ऑनलाइन गेमिंग की लत में 14 साल के नाबालिग ने की चोरी, साथी और ज्वैलर भी गिरफ्तार
भीलवाड़ा । ऑनलाइन गेम के बढ़ते नशे ने एक 14 वर्षीय नाबालिग को अपराध की राह पर ला खड़ा किया। पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए उसने पहले छोटी रकम चुराई और फिर बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया। चोरी किए गए पैसों से वह ऑनलाइन गेमिंग के लिए रिचार्ज करवाता था।
मामला सुभाष नगर थाना क्षेत्र का है। थाना प्रभारी कैलाश चंद्र ने बताया कि 20 जनवरी 2026 को विनोद कुमार अजमेरा ने अपने घर में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि विजय सिंह पथिक नगर में उनके दो मकान हैं, जिनमें से एक मकान रात के समय खाली रहता है। मकान के पीछे की ओर एक खिड़की अक्सर खुली रहती थी।
पड़ोस में रहने वाले एक नाबालिग बच्चे ने इसी का फायदा उठाया। उसने पहले दो-तीन बार छोटी-छोटी रकम चोरी की। बाद में बड़ी चोरी की घटना सामने आने पर मामला थाने तक पहुंचा। पुलिस ने जांच के दौरान नाबालिग को पकड़कर निरुद्ध किया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह पहले भी चोरी कर चुका है और चोरी के पैसों से ऑनलाइन गेमिंग करता था।
जांच में सामने आया कि उसका दोस्त समीर हुसैन सोरगर भी इस मामले में शामिल था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर चार दिन के रिमांड पर लिया है। चोरी का सामान एक ज्वैलर कान्हा सोनी को बेचा गया था, जिसे भी गिरफ्तार कर एक दिन के रिमांड पर लिया गया है। मामले में फिलहाल अनुसंधान जारी है।
थाना प्रभारी ने बताया कि नाबालिग मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलता था और रिचार्ज के जरिए गेमिंग करता था। पुलिस अब उस व्यक्ति की भी तलाश कर रही है जो गेमिंग आईडी और रिचार्ज की सुविधा उपलब्ध कराता था। उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे समय-समय पर बच्चों के मोबाइल की जांच करें और देखें कि कहीं वे ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स के जरिए गलत दिशा में तो नहीं जा रहे।
अधिकतर ऑनलाइन गेम शुरुआत में मुफ्त होते हैं, लेकिन बाद में इन-ऐप खरीदारी के लिए पैसे मांगे जाते हैं। बच्चों को इसकी समझ नहीं होती और वे खर्च करने लगते हैं। धीरे-धीरे उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ता है। हारने पर गुस्सा, झुंझलाहट और आक्रामक व्यवहार सामने आने लगता है। गेम की लत के कारण कुछ बच्चे पैसों के लिए चोरी तक कर बैठते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार माता-पिता से बदतमीजी, मारपीट जैसे व्यवहार कंडक्ट डिसऑर्डर का रूप ले सकते हैं। इसके साथ डिप्रेशन और एंग्जायटी का खतरा भी बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए बच्चों को आउटडोर खेल, सामाजिक गतिविधियों और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित करना जरूरी है, ताकि वे वास्तविक जीवन से जुड़े रह सकें।
