आसींद क्षेत्र में पैंथर का खौफ: बरसनी में जमाया डेरा, वन विभाग मौन

Update: 2026-03-19 07:46 GMT

आसींद (भीलवाड़ा हलचल)। क्षेत्र के बरसनी गांव और आसपास के माइनिंग इलाकों में पिछले कुछ दिनों से पैंथर की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों और किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। खनन क्षेत्र होने के कारण सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पैंथर ने अब आबादी और खेतों के नजदीक अपना डेरा जमा लिया है, जिससे इलाके में भारी दहशत का माहौल है।

खेतों में जाना हुआ दूभर, किसान भयभीत

बरसनी गांव के पास स्थित कृषि क्षेत्रों में इन दिनों पैंथर का मूवमेंट सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि पैंथर अक्सर शाम ढलते ही सक्रिय हो जाता है, जिससे खेतों में पिलाई और रखवाली का कार्य करने वाले किसान अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। कई बार पैंथर को चट्टानों और झाड़ियों के पीछे घात लगाए देखा गया है।

माइनिंग क्षेत्र बना पैंथर का सुरक्षित ठिकाना

बरसनी के आसपास का क्षेत्र खनन (माइनिंग) बेल्ट होने के कारण यहाँ गहरी खाइयां और पत्थर के ऊंचे टीले हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इन सुनसान माइनिंग क्षेत्रों ने पैंथर को छिपने के लिए सुरक्षित जगह मुहैया कराई है। शिकार की तलाश में अब यह वन्यजीव रिहाइशी इलाकों की ओर रुख कर रहा है, जिससे मवेशियों पर हमले का खतरा भी बढ़ गया है।

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पैंथर के मूवमेंट को लेकर वन विभाग को कई बार लिखित और मौखिक सूचना दी जा चुकी है, लेकिन अब तक विभाग की ओर से धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। न तो क्षेत्र में पिंजरा लगाया गया है और न ही गश्त बढ़ाई गई है। विभाग की इस उदासीनता के कारण ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पैंथर को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू नहीं किया गया, तो कोई बड़ी जनहानि हो सकती है।

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