कमर्शियल गैस की किल्लत, शादियों में भट्ट‍ियों का सहारा

Update: 2026-03-25 11:31 GMT

भीलवाड़ा (मदनलाल वैष्णव)। जिले में पिछले कुछ दिनों से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति ठप होने से आम जनजीवन और व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। स्थिति यह है कि शादियों के सीजन और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों में हलवाइयों को मजबूरन पारंपरिक लकड़ी की भट्ट‍ियों पर खाना बनाना पड़ रहा है, जिससे आयोजकों और कामगारों दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

शादियों की खुशियों में गैस की किल्लत का खलल

वर्तमान में ढूंढ और शादियों का सीजन जोरों पर है, लेकिन गैस की किल्लत ने खुशियों के रंग में खलल डाल दिया है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, जहां पहले कैटरर्स कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग करते थे, वहां अब लकड़ियों के ढेर नजर आ रहे हैं। हलवाइयों का कहना है कि गैस चूल्हे पर खाना जल्दी और शुद्धता के साथ बनता है, जबकि लकड़ी के चूल्हों पर आंच को नियंत्रित करना मुश्किल होता है। इससे समय अधिक लगता है और धुएं के कारण काम करना दूभर हो जाता है।

बजट और व्यवस्थाएं चरमराईं

गैस उपलब्ध न होने के कारण आयोजकों को अब ऊंचे दामों पर लकड़ियां खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे अचानक बढ़ी इस व्यवस्था ने शादी-ब्याह का बजट भी बिगाड़ दिया है। केवल मांगलिक कार्य ही नहीं, बल्कि शोक संतप्त कार्यक्रमों में भी परिजनों को इस समस्या से जूझना पड़ रहा है। अचानक होने वाले इन कार्यक्रमों के लिए तुरंत सिलेंडर की व्यवस्था करना नामुमकिन साबित हो रहा है। हलवाइयों का दर्द है कि गैस के बिना बड़े आयोजनों को संभालना बहुत चुनौतीपूर्ण है और वे फिर से पुराने समय की तरह लकड़ी और कोयले पर निर्भर हो गए हैं, जिससे काम की गति आधी रह गई है।

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