भीलवाड़ा में शारदीय नवरात्रि पर गरबे की धूम, गुजराती संस्कृति की झलक

Update: 2025-09-26 18:05 GMT



भीलवाड़ा। शहर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर गरबे का उत्सव बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। शहर के विभिन्न मोहल्लों में युवा और परिवार पांडाल स्थापित कर माता अम्बे की प्रतिमा के सामने पारंपरिक गुजराती गरबा गीतों पर डांडिया खेलते हुए नजर आ रहे हैं। शाम के समय माता की आरती के पश्चात युवा और वयस्क दोनों ही पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर गरबा रास का आनंद ले रहे हैं।

विशेष रूप से पासल रोड, भीलवाड़ा शहर के कई प्रमुख मोहल्लों में युवा समूहों ने बड़े पैमाने पर पांडाल सजाए हैं। पांडालों में मां अम्बे की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसके चारों ओर रंग-बिरंगी लाइटें और सजावट की गई हैं। यहां शाम के समय गुजराती गरबा गीतों की धुन पर युवा समूह डांडिया खेलते हैं और दर्शक आनंद लेते हैं। नगरवासियों के अनुसार, यह आयोजन स्थानीय समुदाय में भाईचारा और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा देता है।

भीलवाड़ा में गुजराती समुदाय का काफी बसा हुआ हिस्सा है, जो अपनी पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों को आज भी जीवित रखे हुए हैं। पिछले कई सालों से यह समुदाय नवरात्रि के दौरान गरबा रास का आयोजन करता आ रहा है। पांडालों में युवा पारंपरिक गुजराती पोशाकों में सजे नजर आते हैं। महिलाएं रंग-बिरंगे चोली और घाघरा पहनकर गरबा रास का आनंद ले रही हैं, जबकि पुरुष कुर्ता-पायजामा और पारंपरिक पगड़ी पहनकर डांडिया खेलते हैं।

शहर में इस उत्सव का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक भी है। यह युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। पांडालों में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी देखी जा रही है। हर शाम, लोग गरबा और डांडिया खेलते हुए आनंदित दिखाई देते हैं, और शहर में उत्सव का माहौल छा जाता है।

इसके अलावा पासल रोड पर गरबा के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिताओं में नृत्य, संगीत और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल हैं। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का अवसर प्रदान करता है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और युवाओं के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच भी है। आयोजक और मोहल्ले के लोग मिलकर पांडालों की सजावट, व्यवस्था और सुरक्षा का ध्यान रखते हैं, ताकि सभी आनंदपूर्वक इस पर्व का हिस्सा बन सकें।

इस प्रकार, भीलवाड़ा शहर में शारदीय नवरात्रि का उत्सव न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक एकता, सामाजिक मेलजोल और पारंपरिक गुजराती धरोहर को जीवित रखने का अवसर भी है। नगरवासियों और आगंतुकों की भागीदारी से यह पर्व शहर में हर साल उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है।


 

Similar News

निशुल्क चिकित्सा शिविर में उमड़ेगा सितारों का जमावड़ा:: गुलशन पांडे, राज जांगिड़ और अनोखी राजस्थानी बढ़ाएंगे कार्यक्रम की शोभा