देसी गुड़ की मिठास से महक उठा गौरा का खेड़ा, परंपरागत तरीके से चल रही चरखी

Update: 2026-01-20 11:58 GMT

भीलवाड़ा। गौरा का खेड़ा गांव में पारंपरिक तरीके से देसी गुड़ बनाने का कार्य शुरू हो गया है। गांव में चल रही चरखियों पर तैयार किया गया गुड़ मौके पर ही बिक्री के लिए उपलब्ध है, वहीं यहां से तैयार गुड़ भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, कोटा सहित अन्य जिलों में भी भेजा जा रहा है।

यहां बनाए जाने वाले देसी गुड़ की खासियत इसकी शुद्धता और प्राकृतिक निर्माण प्रक्रिया है। गन्ने के रस को उबालते समय उसमें मौजूद मैल व अशुद्धियों को निकालने के लिए जंगली भिंडी और सरसों तेल का उपयोग किया जाता है। इस पारंपरिक विधि से तैयार गुड़ स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी माना जाता है।

ग्रामीण कालूलाल शर्मा ने बताया कि सर्दियों के मौसम में देसी गुड़ की मांग काफी बढ़ जाती है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोग सालभर के लिए यहीं से गुड़ ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि आज भी गांवों में देसी गुड़ की मांग बनी हुई है और लोग शुद्ध व प्राकृतिक गुड़ को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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