भगवान ने स्वयं 'खाती' बन सुधारी नरसी की गाड़ी: सुमधुर भजनों पर झूमा कमला विहार
भीलवाड़ा । कमला विहार स्थित श्री राधा कृष्ण पार्क में आयोजित 'नानी बाई रो मायरो' कथा के दूसरे दिन शनिवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा वाचिका पूज्या दीपा दाधीच ने अपनी सुमधुर वाणी से भगवान और भक्त के अटूट संबंध की महिमा का बखान किया।
कुमकुम पत्रिका और अंजार प्रस्थान का प्रसंग
मीडिया प्रभारी दीपक शर्मा ने बताया कि कथा के दौरान दीपा दाधीच ने कुमकुम पत्रिका के पहुंचने, नरसी मेहता का अंजार नगर के लिए प्रस्थान और श्रीकृष्ण-नरसी मिलन के प्रसंगों का विस्तार से भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कुमकुम पत्रिका के माध्यम से जब नरसी जी को मायरे का निमंत्रण मिला, तो उन्होंने बिना किसी सांसारिक चिंता के सब कुछ प्रभु पर छोड़ दिया। यह निमंत्रण मात्र एक रस्म नहीं, बल्कि अटूट विश्वास का प्रतीक था।
भगवान ने स्वयं किया नरसी का मार्गदर्शन
कथावाचिका ने भावविभोर करते हुए बताया कि जब नरसी जी ने प्रस्थान किया, तब भगवान कृष्ण ने उन्हें केदार राग और तुलसी की माला भेंट की। प्रभु ने वचन दिया कि जब भी नरसी इस राग का गायन करेंगे, वे स्वयं दौड़े चले आएंगे। कथा में वह क्षण अत्यंत भावुक कर देने वाला था जब भगवान ने स्वयं खाती (बढ़ई) का रूप धारण कर नरसी जी की टूटी बैलगाड़ी ठीक की और उन्हें गंतव्य तक पहुँचाया।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
कथा के दौरान दीपा दाधीच ने जब 'गाड़ी में बिठा ले रे बाबा...' भजन गाया, तो पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। उन्होंने सीख दी कि निश्चल भक्ति और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास ही वह मार्ग है, जिससे कठिन से कठिन बाधाएं दूर हो जाती हैं। यह कथा हमें सिखाती है कि भगवान अपने भक्त का भार स्वयं उठाते हैं।