मनुष्य को प्रति समय सकारात्मक,ईश्वर भक्ति में रहते हुए इस सांसारिक जीवन को जीना चाहिए
आकोला (रमेश चंद्र डाड)श्री बाणमाता शक्तिपीठ गोवटा बांध पर श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन श्रीमद् भागवत कथा का वाचन कर रहे प्रेमनारायण महाराज (गेंहूखेड़ी) ने कथा वाचन में बताया कि जो मनुष्य अपना जीवन प्रभु को समर्पित करके जीता है। उसका जीवन आनंद में व्यतीत होता है। आप जब भी जहां भी जिस किसी को भी देखें अपने इष्ट प्रभु कि उसमें मूर्ति देखेंगे और उनके दर्शन करते समय कहेंगे तुम छुप ना सकोगे यह मेरी आत्मा की आवाज है। तो ईश्वर बड़े प्रसन्न होकर भक्त का सदैव ध्यान रखते हैं। इस जीवन में भोग से रोग, आचार से विचार, व्यवहार से उद्धार का सीधा संबंध है। मनुष्य जैसा भोजन करता है, जैसा अन्न ग्रहण करता है । वैसा ही उसका मन काम करने लग जाता है। इसीलिए मनुष्य को प्रति समय सकारात्मक, ईश्वर भक्ति में रहते हुए इस सांसारिक जीवन को जीना चाहिए। इस संसार में भांति-भांति के लोग हैं जिनके साथ रहने के लिए हमें वैसा व्यवहार करना चाहिए, जैसा हम हमारे लिए पसंद करते हैं। मूर्ख व्यक्ति बोलने के बाद सोचता है और विद्वान व्यक्ति सोच सोच कर बोलता है। इसीलिए विद्वान का सभी जगह सम्मान बना रहता है। श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भजनों के साथ भक्त भावविभोर होकर खूब झूमे। पांडाल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। कथा श्रवण करने श्री बाण माता शक्तिपीठ क्षेत्र के आसपास के गांव के साथ-साथ दूरदराज से भी काफी भक्तजन पहुंचे हैं जो यही निवास कर कथा श्रवण कर रहे हैं। कथा प्रतिदिन 12 बजे लेकर 3 बजे तक की जा रही है। मुख्य यजमान नंदकिशोर सनाढ्य, जोड़ा सत्यनारायण चाड़, छीतर धाकड़, हरिओम तेली ने पूजा अर्चना करवाई।कार्यक्रम में भारी संख्या में महिला, पुरुष भक्तजन मौजूद थे।