एमजीएच के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, महिला के पेट से निकाली 8 किलो की 'आफत'

Update: 2026-04-03 09:29 GMT

भीलवाड़ा।  महात्मा गांधी चिकित्सालय (MGH) की मातृ एवं शिशु इकाई (MCH) के चिकित्सकों ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता और अटूट संकल्प का परिचय दिया है। अस्पताल के सर्जनों ने एक बेहद जटिल और जोखिम भरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए एक 38 वर्षीय महिला के अंडाशय से 8 किलोग्राम वजनी और 35 सेंटीमीटर विशालकाय गांठ निकालकर उसे नया जीवन प्रदान किया है।

सांस लेना भी हो गया था दूभर

जानकारी के अनुसार, राजसमंद जिले के आमेट की रहने वाली यह महिला लंबे समय से पेट में असहनीय दर्द और भारीपन से जूझ रही थी। धीरे-धीरे इस गांठ ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि महिला का उठना-बैठना और यहां तक कि सामान्य रूप से सांस लेना भी दूभर हो गया था। जब महिला को एमसीएच विंग लाया गया, तो जांच में अंडाशय में एक दुर्लभ और विशाल ट्यूमर की पुष्टि हुई।

चुनौतीपूर्ण था ऑपरेशन: आंतरिक अंगों को था खतरा

विभागाध्यक्ष डॉ. मनीषा दाधीच व यूनिट हेड डॉ. सपना आसेरी के कुशल निर्देशन में इस केस को एक चुनौती के रूप में लिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, 35 सेंटीमीटर बड़ी गांठ को निकालना तकनीकी रूप से बहुत कठिन था, क्योंकि सर्जरी के दौरान भारी इंटरनल ब्लीडिंग (आंतरिक रक्तस्राव) और आसपास के नाजुक अंगों के क्षतिग्रस्त होने का जबरदस्त खतरा बना हुआ था।

इन जांबाजों की टीम ने हासिल की सफलता

घंटों चले इस क्रिटिकल ऑपरेशन में सर्जन डॉ. वर्षा सांखला (चौहान) व डॉ. जया अपावत ने धैर्य और सूक्ष्मता के साथ गांठ को शरीर से अलग किया। निश्चेतना विभाग से डॉ. आशीष नारोलिया व डॉ. शिल्पा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में सहयोगी के रूप में रविंद्र सिखवाल, आशीष डीडवानिया व डॉ. विनोद अहीर शामिल रहे।

सरकारी अस्पताल की सेवा पर जताया भरोसा

सफल सर्जरी के बाद महिला की स्थिति अब खतरे से बाहर है। महिला के परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि सरकारी अस्पताल में इस स्तर की उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिलना आमजन के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

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