भीलवाड़ा के 16 गांव के 60 से अधिक किसानों ने गो आधारित खेती का प्रशिक्षण लिया
भीलवाड़ा |भीलवाड़ा जिले के 16 गांवों के 60 से अधिक किसानों ने सरोज देवी फाउंडेशन (एसडी फाउंडेशन) के तत्वाधान और संयोजन में गो आधारित खेती का प्रशिक्षण लिया। यह प्रशिक्षण कोटा जिले के जाखोड़ा, कैथून स्थित गोयल ग्रामीण विकास संस्थान के रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में किसानों ने वार्षिक आहार वाटिका की जानकारी प्राप्त की। इस प्रणाली के अनुसार केवल एक बीघा भूमि पर पूरे परिवार (6 सदस्यों) के लिए वर्ष भर का अनाज, दलहन, तिलहन, फल, फूल, मसाले और सब्जियां उगाई जा सकती हैं। संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. पवन टॉक के अनुसार, इस तरीके से परिवार का पोषण सुनिश्चित होता है और विभिन्न प्रकार की फसलें होने के कारण कीट और रोग कम आते हैं।
किसानों ने प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लिया और वार्षिक आहार वाटिका के विभिन्न पहलुओं पर प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की। उन्होंने समझा कि छोटे क्षेत्र में फसलों का नियंत्रित प्रबंधन सीखकर इसे बड़े क्षेत्र में भी लागू किया जा सकता है।
इस प्रशिक्षण में भाग लेने वाले गांवों में टोकरवाड, धनपुरा, देवपुरा, अटलपुरा, किशनगढ़, गुलाबपुरा, जयसिंहपुरा, जांतल, जालिमपुरा, ढंड का खेडा, परडोदास, बागा का खेडा, मोतीपुर, रायला, सरेरी और हमीरगढ़ शामिल हैं।
इस वार्षिक आहार वाटिका में वर्तमान में गेहूं, जौ, चना, अलसी, सरसों, मसूर, अरहर, बैंगन, टमाटर, मिर्च, मूली, गोभी, पत्ता गोभी, मटर, प्याज, लहसून, सहजन, अमरूद, आंवला, चीकू, शहतूत, नींबू, मौसमी, बैर, पालक, राई, धनिया, अनार, करूंदा, नेपियर घास, नीम, गिलोय, कनेर जैसी कई फसलें और फल लगे हुए हैं।
समन्वयक महेश चन्द्र नवहाल ने बताया कि इस प्रशिक्षण से किसान शुद्ध जैविक तरीके से खेती कर अपने परिवार का पूरा पोषण सुनिश्चित कर सकेंगे।
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