गांधी पार्क की बदहाली पर नगर निगम को घेरा: 5000 रुपये महीने के ठेके पर उठाए सवाल
भीलवाड़ा। शहर के प्रमुख पार्कों में शुमार महात्मा गांधी अस्पताल के पास स्थित गांधी पार्क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने जिला कलेक्टर और नगर निगम को ज्ञापन सौंपकर पार्क के रखरखाव में हो रही घोर लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।
कचरे का ढेर और असामाजिक तत्वों का डेरा
ज्ञापन में बताया गया कि नगर निगम द्वारा पार्क की नियमित सफाई के दावे पूरी तरह खोखले हैं। पार्क में महीनों से सफाई नहीं हुई है, जिसके कारण गंदगी के ढेर लगे हैं। अस्पताल के पास होने के कारण मरीज और उनके परिजन यहां रुकते हैं, लेकिन डस्टबिन कचरे से लबालब हैं और आवारा कुत्तों का आतंक बना हुआ है। पार्क में लाइट व्यवस्था पूरी तरह ठप है, जिससे रात के समय यह असामाजिक तत्वों और अपराधियों का शरण स्थल बन गया है।
5000 रुपये के ठेके ने चौंकाया
सबसे गंभीर आरोप पार्क के रखरखाव के ठेके को लेकर लगाए गए हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पार्क के रखरखाव का ठेका मात्र 5000 रुपये प्रतिमाह में दिया गया है। नागरिकों का कहना है कि:
एक मजदूर की न्यूनतम दिहाड़ी भी 285 रुपये है।
इतने कम बजट में पार्क का संचालन करना नामुमकिन है।
यह ठेका पूरी तरह से 'बिना दिमाग लगाए' (Without application of mind) और असंवैधानिक तरीके से दिया गया है।
सुझाव और मांगें
नागरिकों ने पार्क की दशा सुधारने के लिए न्यूनतम स्टाफ की मांग की है, जिसमें 1 चौकीदार, 1 बागवान और 3 श्रमिक शामिल हों। साथ ही, यह भी सुझाव दिया गया कि यदि निगम रखरखाव नहीं कर सकता, तो 'मुस्कान फाउंडेशन' जैसे एनजीओ को इसे गोद लेने की अनुमति दी जाए।
