मेवाड़ महाराणा के राजदरबार में गूंजा मांडल का गैर नृत्य, शाही अंदाज़ में हुआ स्वागत

Update: 2026-03-02 18:39 GMT

भीलवाड़ा |मेवाड़ की आन-बान-शान के प्रतीक सिटी पैलेस उदयपुर में होलिका दहन के पावन अवसर पर इस वर्ष एक बार फिर भीलवाड़ा जिले की मांडल कस्बे की ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर गैर नृत्य ने शाही ठाठ के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जैसे ही होलिका दहन की ज्योति प्रज्वलित हुई, वैसे ही राजदरबार का वातावरण ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक वेशभूषा की छटा से जीवंत हो उठा।

राजस्थान लोक कला केन्द्र मांडल के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष प्रस्तुति में दल का नेतृत्व वरिष्ठ लोक कलाकार रमेश बुलिया ने किया। उनके नेतृत्व में कलाकारों ने शौर्य, उल्लास और परंपरा से ओतप्रोत गैर नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति देकर दरबार में उपस्थित देश-विदेश से आए सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

रंग-बिरंगी पगड़ियाँ, पारंपरिक अंगरखे, सधी हुई लय और गोल घेरों में घूमते नर्तकों की तालमेल भरी गतियाँ—हर दृश्य मानो राजस्थान की जीवंत विरासत का साक्षात रूप बन गया। पर्यटकों ने इस शाही अंदाज़ में प्रस्तुत गैर नृत्य का भरपूर आनंद लिया और तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

रमेश बुलिया ने बताया कि विगत कई वर्षों से राजस्थान लोक कला केन्द्र के नेतृत्व में मांडल से गैर नृत्य दल मेवाड़ महाराणा के राजदरबार में अपनी प्रस्तुति देता आ रहा है। इस परंपरा का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, लोक वेशभूषा और परंपराओं को वैश्विक मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत करना है।

राजदरबार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और गैर नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति ने मिलकर ऐसा समां बाँधा कि होली का उत्सव और भी रोमांचकारी एवं अविस्मरणीय बन गया। यह आयोजन न केवल मांडल के लिए गौरव का विषय है, बल्कि सम्पूर्ण राजस्थान की सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक भी है।

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