कैंसर पीड़ित के लिए रक्तवीर अंशुल आचार्य ने किया SDP डोनेशन, समय पर मिली जीवनदायी प्लेटलेट्स
भीलवाड़ा/महात्मा गांधी चिकित्सालय। मानवता की सेवा में रक्तदाताओं की भूमिका सर्वोपरि है, और इसका जीवंत उदाहरण हाल ही में महात्मा गांधी ब्लड सेंटर में देखने को मिला। कैंसर से जूझ रहे एक गंभीर मरीज की जान बचाने के लिए रक्तवीर अंशुल आचार्य दाधीच आगे आए और अपना पहला SDP (Single Donor Platelet) डोनेट कर मानव धर्म निभाया।
जांच के बाद अंशुल पाए गए सबसे उपयुक्त
विक्रम दाधीच ने जानकारी देते हुए बताया कि मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए तत्काल फ्रेश प्लेटलेट्स की दरकार थी। इसके लिए करीब 5 से 7 रक्तदाताओं को जांच के लिए बुलाया गया था। गहन चिकित्सा परीक्षण और तकनीकी मापदंडों पर खरे उतरने के बाद केवल अंशुल आचार्य ही SDP डोनेशन के लिए पूरी तरह फिट पाए गए।
क्या है SDP प्रक्रिया?
SDP यानी सिंगल डोनर प्लेटलेट एक आधुनिक और विशेष प्रक्रिया है। इसमें मशीन के जरिए रक्तदाता के शरीर से केवल प्लेटलेट्स निकाली जाती हैं और शेष रक्त वापस शरीर में भेज दिया जाता है। यह सामान्य प्लेटलेट्स के मुकाबले कहीं अधिक प्रभावी होती हैं और कैंसर व डेंगू जैसे गंभीर रोगियों के लिए 'संजीवनी' का काम करती हैं।
सेवाभावी प्रयासों की सराहना
इस पुनीत कार्य पर बालाजी मंदिर के महंत आशुतोष शर्मा, अशोक त्रिपाठी (शाहपुरा) और रोहित जोशी ने अंशुल के जज्बे को सलाम करते हुए उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। रक्त संग्रहण की इस प्रक्रिया में डॉ. जया शेखावत, डॉ. प्रतिभा शेखावत, प्रभारी दिनेश शर्मा और कमलेश मीणा का विशेष तकनीकी सहयोग रहा।