भीलवाड़ा । श्री रामधाम रामायण मंडल ट्रस्ट की ओर से हमीरगढ़ रोड स्थित रामधाम में आयोजित चातुर्मास प्रवचन में गुरुवार को केदारखण्ड, अगस्तय मुनि आश्रम के स्वामी अच्युतानंद ने श्रीरामचरितमानस की एक अत्यंत मार्मिक चौपाई पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर चिंतन करते हुए “परहित सरिस धर्म नहिं भाई, परपीड़ा सम नहिं अधमाई” का उल्लेख किया और समझाया कि मानव जीवन केवल सांसारिक सुखों में ही न बीते, बल्कि करुणा, दया, दान और धर्म के लिए समर्पित हो।स्वामी ने कहा कि इस कलियुग में जहाँ भौतिकता ने मानवीय संवेदनाओं को ढक लिया है, वहाँ श्रीरामचरितमानस के आदर्श हमें स्मरण कराते हैं कि जीवन की सार्थकता केवल आत्मकल्याण में नहीं, अपितु परहित में निहित है। उन्होंने बताया कि “दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान” इस उक्ति के अनुसार, यदि हम अपने हृदय में दया का संचार कर लें तो सभी धार्मिक आचरण स्वयं उसमें समाहित हो जाते हैं।उन्होंने कहा कि दान केवल धन का नहीं, बल्कि समय, ज्ञान और सेवा का भी हो सकता है। जब हम किसी जरूरतमंद के लिए दो शब्द सहानुभूति के बोलते हैं, तो वह भी एक प्रकार का दान है। धर्म का पालन केवल कर्मकाण्डों तक सीमित न हो, बल्कि व्यवहार में उतरकर समाज के लिए उपयोगी बने। तप का अर्थ केवल कठिन व्रत और उपवास नहीं, अपितु अपनी इन्द्रियों और वासनाओं पर नियंत्रण रखना भी है। स्वामी ने रामचरितमानस के प्रसंगों से उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार भगवान राम ने अपने जीवन में दया और परोपकार को सर्वोपरि रखा। चाहे वह शबरी के झूठे बेर खाना हो या निषादराज को गले लगाना – यह सब उनके विशाल हृदय का परिचायक है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे भीतर दूसरों के प्रति करुणा और सेवा का भाव नहीं जागता, तब तक हमारा धर्म अधूरा है। आश्रम में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित किया कि वे जीवन को केवल व्यक्तिगत सफलताओं तक सीमित न रखें। प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन एक ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे किसी और का भला हो, चाहे वह छोटा सा ही क्यों न हो। अंत में स्वामी ने आग्रह किया कि हम सभी श्रीरामचरितमानस के इस संदेश को अपने जीवन में उतारें और दया, दान, धर्म तथा तप को अपने आचरण का आधार बनायें। यही जीवन का सच्चा उद्देश्य है और यही वह मार्ग है जो हमें आत्मकल्याण और ईश्वर के समीप ले जाता है। ट्रस्ट के सचिव अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि चातुर्मास प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9 बजे से हो रहे हैं और शिवालय में सावन मास में सुबह-शाम भगवान का अभिषेक और श्रृंगार किया जा रहा है। गुरुवार को अभिषेक चार्विक पौत्र गोविंद प्रसाद सोडाणी की ओर से कराया गया।