भीलवाड़ा राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील) के प्रदेश अध्यक्ष नीरज शर्मा ने शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर ग्रीष्मावकाश पूर्व सत्र की भांति 17 मई में से 30 जून तक रखने की मांग की है।
शिविरा पंचांग के अनुसार 2026-27 का नवीन शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है इसके अंतर्गत दिनांक 27 मार्च 2026 से 6 अप्रैल 2026 तक एवं 10 अप्रैल 2026 से 15 अप्रैल 2026 तक दो चरणों में सघन प्रवेशोत्सव कार्यक्रम भी चलेगा साथ ही बच्चों की पढ़ाई भी शुरू हो जाएगी एवं ग्रीष्मावकाश से पूर्व प्रथम परख का आयोजन भी किया जाएगा। हाल ही में शिक्षा निदेशालय ने एक प्रस्ताव बनाकर शिक्षा मंत्री को भेजा है जिसके अनुसार ग्रीष्मावकाश 17 मई से 20 जून तक रखने की अनुशंसा की गई है। इसका कारण योग दिवस 21 जून से विद्यालय खोलने का प्रयास हो सकता है जो कि अनुचित है। क्योंकि ग्रीष्मावकाश के दौरान भी हर साल 21 जून को प्रत्येक विद्यालय में योग दिवस मनाया जाता है और शिक्षक अपने मुख्यालय से योग दिवस में भागीदारी कर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करते हैं। जून के अंतिम सप्ताह में प्रदेश में भीषण गर्मी का दौर रहता है एवं बच्चों की विद्यालय आने की मानसिकता नहीं रहती सिर्फ शिक्षकों को परेशान करने के लिए 21 जून से विद्यालय खोलना अनुचित है। अन्य जिलों में पद स्थापित शिक्षक अपने घर परिवार से सैकड़ो किलोमीटर दूर रहकर सेवा करते हैं। वे अवकाश में ही अपने परिवार के साथ रह पाते हैं ऐसे में अवकाश में कटौती करना उनके साथ भी अन्याय है। यदि ग्रीष्मावकाश 45 दिन से कम किया जाता है तो अवकाश के दिनों में कार्य की एवज में शिक्षक संगठनों द्वारा उपार्जित अवकाश की मांग की जाएगी इससे सरकार पर आर्थिक भार बढ़ेगा। अतः ग्रीष्म अवकाश पूर्व सत्र की भांति 17 मई से 30 जून तक रखने के आदेश प्रदान कर राहत दिलावे।