शिव बारात के रंग में रंगी सांवरिया बस्ती विराट हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब 4 हजार लोगों ने ग्रहण किया सामूहिक भोज

Update: 2026-01-19 08:44 GMT


भीलवाड़ा/सवाई भोज नगर |सांवरिया बस्ती (वार्ड 19-20) में रविवार को 'बस्ती विराट हिंदू सम्मेलन' के माध्यम से हिंदू शक्ति और सामाजिक एकजुटता का भव्य प्रकटीकरण हुआ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित इस कार्यक्रम का शंखनाद प्रातः काल वार्ड नंबर 19 स्थित सहजानंद आश्रम से प्रभात फेरी के साथ हुआ

प्रभात फेरी के दौरान श्रद्धालुओं ने बस्ती में जन-जागरण करते हुए प्रत्येक प्रमुख चौराहों पर दोपहर की शिव बारात एवं 'एक संगत-एक पंगत' (सामूहिक भोज) के आयोजन की जानकारी दी भजन-कीर्तन के साथ निकाली गई इस फेरी में कार्यकर्ताओं ने सूचना पत्रकों का वितरण कर समाज को जागरूक किया भक्ति के रंग में रंगे इस माहौल में बच्चे, युवा, बुजुर्ग और मातृशक्ति भजनों की धुन पर नाचते-गाते हुए निकले हाथों में भगवा ध्वज और 'जय श्रीराम' के उद्घोष से समूचा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा

*सांवरिया सेठ मंदिर से निकली भव्य शिव बारात धरती पर उतरा देवलोक*

सांवरिया बस्ती (वार्ड 20) स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर से जब शिव बारात का शुभारंभ हुआ, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो कैलाश पर्वत स्वयं धरती पर उतर आया हो इस अलौकिक दृश्य ने समूचे क्षेत्र को भक्ति के रस में डुबो दिया बारात में सजी सजीव झाँकियाँ आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं,जहाँ बस्ती के युवाओं ने देवताओं का रूप धरकर श्रद्धालुओं,पूरी बस्ती को मंत्रमुग्ध कर दिया जिसमें सजीव झांकियो में दिनेश और दिलखुश सेन ने महादेव और माता पार्वती के रूप में साक्षात शिव-शक्ति का बोध कराया वहीं, दर्पण और कनक लोढ़ा ने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के वैभव को दर्शाया ब्रह्मा के रूप में शिवरतन पारीक और नारद मुनि के वेश में मेहमान कलाकार रामचंद्र मूंदड़ा ने अपनी प्रस्तुति से दृश्य को पौराणिक काल जैसा जीवंत बना दिया बस्ती की बालिकाओं द्वारा सजाया गया 'राम दरबार' मर्यादा पुरुषोत्तम के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शा रहा था बारात की विशेषता यह रही कि इसमें शामिल सभी पुरुषों ने एक समान 'केसरिया साफा' धारण किया था, जो एकता और सनातन संस्कृति की भव्यता का प्रतीक बना और 'बुलेट राजा' राहुल की दहाड़ के साथ शुरू हुई इस यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा

*अखाड़े के हैरतअंगेज करतब और मातृशक्ति द्वारा शक्ति का शौर्य प्रदर्शन*

जैसे-जैसे बारात आगे बढ़ी, स्वागत और शौर्य का एक नया अध्याय जुड़ता गया मुख्य मार्गों पर पुष्प वर्षा और तिलक लगाकर बारातियों,शोभा यात्रा का भव्य अभिनंदन किया गया जगह-जगह सामूहिक आरती का आयोजन हुआ,जहाँ कुटुंब सहित झाँकियों के रूप में विराजमान देवताओं का आशीर्वाद लिया इस बारात, शोभा यात्रा का सबसे रोमांचक और ऊर्जावान हिस्सा 'दुर्गा शक्ति अखाड़ा' रहा अखाड़ा प्रमुख बहन कविता और उनकी टीम ने अपनी लाठियों और साहसी करतबों से वीरता का ऐसा प्रदर्शन किया कि उपस्थित जनसमूह 'वीर रस' से भर उठा बहनों के इस अदम्य साहस ने नारी शक्ति की एक नई परिभाषा पेश की वहीं दूसरी ओर सजी-धजी महिलाओं की मंडलियों ने भजन-कीर्तन और नृत्य से वातावरण को आनंदमय बना दिया नाचते-गाते श्रद्धालुओं और बस्तीवासियों के उत्साह ने इस बारात को एक ऐतिहासिक उत्सव में बदल दिया यह भव्य शोभा यात्रा,बारात मुख्य मार्गों से होती हुई आज़ाद नगर स्थित 'अग्रसेन मांगलिक भवन' पर पूर्ण वैभव के साथ संपन्न हुई

*मंच कार्यक्रम सांस्कृतिक प्रस्तुति संत प्रवचन,प्रस्तावना*

संत सानिध्य सहजानंद आश्रम श्रद्धानंद  महाराज संकट मोचन बालाजी मंदिर रामनिवास महाराज,महानगर दीपक जी सेन एडवोकेट सुनीता सांखला समिति अध्यक्ष जगदीश पुरोहित मंच आसीन हुए सर्प्रथम दीप प्रज्वलन के साथ श्री गणेश वंदना प्रस्तुति करते हुए कार्यक्रम की शुरुवात की गई बस्ती से वार्ड 19 पार्षद राम लाल योगी नगर निगम महापौर,पार्षद 20 राजेंद्र पोरवाल,पूर्व पार्षद गोविन्द नारायण राठी,भगवती लाल गुर्जर,मनीष सांखला,बाबू लाल सुथार सत्यनारायण सोनी,बजरंग शर्मा द्वारा अतिथियों,संतों का स्वागत सत्कार किया गया समिति कार्यकर्ता कैलाश विश्नोई ने मंच द्वारा संघ प्रस्तावना रखते हुए विजयदशमी 1925 को नागपुर में रोपा गया एक छोटा सा बीज आज विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है। संघ के ये 100 वर्ष केवल विस्तार के नहीं, बल्कि वैचारिक संघर्ष, तीन बार लगे प्रतिबंधों के विरुद्ध अडिग रहने, और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्जीवित करने की साधना के रहे हैं 'व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण' के संकल्प के साथ, संघ ने विभाजन की विभीषिका से लेकर आधुनिक भारत के सामाजिक परिवर्तन तक, हर मोर्चे पर राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का संघर्ष किया है हिंदुत्व युवा संघ की रोहित मारू टीम द्वारा महाकाल आरती की ऐसी भव्य और लयबद्ध प्रस्तुति दी गई कि पांडाल में मौजूद हर भक्त शिवभक्ति में लीन हो गया

*मुख्य वक्ता का उद्बोधन श्री दीपक सेन, महानगर कार्यवाह का सवाई भोज सावरिया बस्ती में*

महानगर कार्यवाह दीपक जी भाई साहब ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कि आज संघ के 100 वर्षों का यह सफर केवल कैलेंडर की तारीखें नहीं, बल्कि लाखों स्वयंसेवकों के अनथक परिश्रम की गाथा है उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ की असली ताकत उसकी 'शाखा पद्धति' है, जहाँ व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण का कार्य होता है उन्होंने स्पष्ट किया कि आज यदि समाज का अटूट विश्वास संघ पर है, तो उसका कारण प्रचारकों और कार्यकर्ताओं का वह निस्वार्थ आचरण है, जिसमें 'स्व' से पहले 'सर्वोपरि राष्ट्र' को रखा गया है। प्रचारक जीवन की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि एक प्रचारक अपना घर-परिवार छोड़कर समाज को ही अपना परिवार मान लेता है, और इसी तप का परिणाम है कि आज कन्याकुमारी से कश्मीर तक संघ की उपस्थिति है उन्होंने जोर देकर कहा कि आज समाज में संघ के कार्यकर्ताओं की साख इतनी गहरी है कि जब किसी कार्य की कमान संघ का कार्यकर्ता संभालता है, तो समाज आँख मूंदकर यह विश्वास करता है कि 'यदि संघ का स्वयंसेवक है, तो कार्य पूरा अनुशासन और सही ढंग से ही संपन्न होगा कार्यक्रम के सफल समापन के अवसर पर समिति अध्यक्ष  जगदीश पुरोहित ने मंच से सभी का आभार प्रकट किया उन्होंने इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देने वाले सभी सहयोगकर्ताओं, कार्यकर्ताओं और दानदाताओं का हृदय से धन्यवाद किया सभी का सम्मान करते हुए कार्यक्रम को औपचारिक विराम दिया अंत में भक्ति और राष्ट्रवाद का अद्भुत संगम भारत माता की सामूहिक आरती के साथ मंच कार्यक्रम संपन्न हुआ

*सामाजिक समरसता का महासंगम 'एक सगत-एक पंगत' बस्ती महाभोज*

स्थानीय अग्रसेन मांगलिक भवन में 'एक सगत-एक पंगत' अभियान के तहत एक ऐतिहासिक 'बस्ती महाभोज' का सफल आयोजन किया गया कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हजारों लोगों द्वारा एक स्वर में 'भोजन मंत्र' का श्रद्धापूर्वक उच्चारण करते हुए किया गया यह आयोजन केवल एक सामूहिक भोज नहीं, बल्कि जातिगत दूरियों को मिटाकर संपूर्ण हिंदू समाज को एक सूत्र में पिरोने का एक जीवंत उदाहरण बना इस अवसर पर आयोजकों ने संदेश दिया कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में आपसी मेलजोल बढ़ता है और छुआछूत जैसी कुरीतियों का जड़ से अंत होता है "एक सगत-एक पंगत" की इस पावन परंपरा ने समाज में एकता और समानता की नई अलख जगाई

इस ऐतिहासिक 'बस्ती महाभोज' की सफलता में समाज के हर व्यक्ति का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभूतपूर्व सहयोग प्राप्त हुआ है सेवा के इस महायज्ञ में सहयोग देने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं और सहयोगियों की सूची इतनी लंबी है कि प्रत्येक नाम को यहाँ अंकित करना संभव नहीं है

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