सच्चा सुकून भीतर ही है, सरल स्वभाव से मिलती है शांति: मुनि महाराज

Update: 2026-01-13 10:49 GMT

भीलवाड़ा। हर व्यक्ति सुख और शांति की तलाश करता है, लेकिन सच्चा सुकून बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही निहित है। भगवान और गुरु तो केवल उस आंतरिक शांति को जाग्रत करने की चाबी हैं। यह विचार पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज के परम प्रभावी शिष्य श्रुतसंवेगी मुनि आदित्यसागर महाराज ने मंगलवार को तरणताल परिसर में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए।

मुनि ने जीवन में शांति के लिए आवश्यक 15 सूत्रों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरल स्वभाव ही शांति का मूल आधार है। सरल व्यक्ति प्राप्त परिस्थिति में ही आनंद अनुभव करता है, जबकि जिद्दी स्वभाव व्यक्ति को अशांति की ओर ले जाता है। जिद के कारण व्यक्ति में मायाचार और अन्य दोष भी प्रवेश कर जाते हैं।

उन्होंने बताया कि शांति प्राप्ति का दूसरा महत्वपूर्ण तत्व निर्भयता है। निर्भय होकर, पूर्ण विश्वास के साथ किए गए कार्य ही सफलता दिलाते हैं। जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों से नहीं डरता, वही जीवन में आगे बढ़ता है और दूसरों के लिए भी मार्गदर्शक बनता है।

ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि प्रातः धर्मसभा में अर्न्तमना प्रसन्नसागर भक्त परिवार के चैनसुख एवं मनोज कुमार अजमेरा ने मुनि श्री का पादप्रक्षालन किया। इंदौर निवासी एवं हैदराबाद प्रवासी विपुल बड़जात्या ने शास्त्र भेंट कर सायंकालीन आरती का पुण्य अर्जन किया।

ट्रस्ट सचिव अजय बाकलीवाल ने जानकारी दी कि बुधवार को प्रातः धर्मसभा में 17 से 19 जनवरी तक होने वाले भक्तामर विधान के लिए पात्रों का चयन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बुधवार सायं 4 बजे मुनि संघ का तिलक नगर जैन मंदिर के लिए मंगल विहार होगा। गुरुवार को मुनि संघ के सानिध्य में मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान को वेदी जी में विराजमान करने के विभिन्न कार्यक्रम होगें।

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