प्रदूषण के सौदागरों की अब खैर नहीं! भीलवाड़ा में 'जीरो टॉलरेंस': पहली बार पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें मारेंगी छापा
भीलवाड़ा हलचल। जिले की टेक्सटाइल इकाइयों से निकलने वाले जहरीले और दूषित पानी से बर्बाद हो रहे पर्यावरण को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने अब 'हंटर' चला दिया है। औद्योगिक लालच में नियमों को ठेंगा दिखाने वाली फैक्ट्रियों पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने बेहद तीखी और प्रभावी घेराबंदी की है।
CO लेवल के पुलिस अफसर भी शामिल: पहली बार एक्शन मोड में प्रशासन
प्रदूषण की समस्या को अब तक केवल फाइलों तक सीमित रखने वाले अधिकारियों के बजाय, प्रशासन ने अब मैदान में विशेष जांच समितियां उतार दी हैं। इस बार की सबसे बड़ी और 'तीखी' बात यह है कि इन समितियों में पहली बार सीओ (CO) स्तर के पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह साफ संकेत है कि अब केवल नोटिस नहीं दिए जाएंगे, बल्कि अवैध रूप से दूषित पानी छोड़ने वालों पर सीधी पुलिसिया कार्रवाई भी हो सकती है।
इन क्षेत्रों पर रहेगी पैनी नजर
राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की सख्त अनुशंसा के बाद गठित ये समितियां भीलवाड़ा, मांडल, गुलाबपुरा और हमीरगढ़ जैसे उन इलाकों में सक्रिय रहेंगी, जहां से लगातार दूषित पानी की शिकायतें आती रही हैं।
समिति का ढांचा: जवाबदेही तय
* अध्यक्ष: संबंधित क्षेत्र के एसडीएम (SDM)।
* टीम: पुलिस, उद्योग विभाग, रीको और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रतिनिधि।
* सीधी रिपोर्ट: समितियों को अपनी जांच रिपोर्ट किसी बाबू को नहीं, बल्कि सीधे जिला कलेक्टर को पेश करनी होगी। इससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म होगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।
क्षेत्रवासियों की शिकायतों पर तुरंत एक्शन
यह समितियां केवल कागजी निरीक्षण नहीं करेंगी, बल्कि क्षेत्रवासियों से मिलने वाली शिकायतों पर 'स्पॉट इन्वेस्टिगेशन' कर तत्काल कार्रवाई करेंगी। प्रशासन के इस कड़े रुख से उन फैक्ट्री मालिकों में हड़कंप मच गया है जो ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) चलाने के बजाय चोरी-छिपे दूषित पानी नाले-नालियों में बहा देते थे।
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