सोने की चमक पर 'ब्रेक' या बड़ा तूफान आने से पहले की शांति? केंद्रीय बैंकों की खरीद 80% गिरी

Update: 2026-03-05 18:06 GMT

मुंबई। वैश्विक स्वर्ण बाजार से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। पिछले कुछ वर्षों से सोने की कीमतों को आसमान पर पहुँचाने वाले दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अचानक अपने हाथ खींच लिए हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई सोने की खरीद में पिछले साल के मुकाबले 80% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस आंकड़े ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच खलबली मचा दी है कि क्या सोने की रिकॉर्ड तोड़ तेजी अब थमने वाली है?


आंकड़ों का खेल: 27 टन से सीधे 5 टन पर आई खरीद

रिपोर्ट के अनुसार, जहां साल 2025 में केंद्रीय बैंक हर महीने औसतन 27 टन सोना खरीद रहे थे, वहीं जनवरी 2026 में यह आंकड़ा सिमटकर महज 5 टन रह गया है।

WGC की सीनियर रिसर्च लीड मारिसा सलीम का कहना है कि साल की शुरुआत अक्सर कई बैंकों के लिए 'शांत अवधि' होती है। सोने की कीमतों में हालिया तेज उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव (Geo-political tension) के कारण रिजर्व मैनेजरों ने फिलहाल "रुको और देखो" की नीति अपनाई है।

चीन की 'गोल्डन' जिद बरकरार, रूस ने झाड़ा पल्ला

भले ही कुल खरीद कम हुई हो, लेकिन कुछ देश अब भी सोने पर भरोसा जता रहे हैं:

उज्बेकिस्तान: जनवरी का सबसे बड़ा खरीदार रहा, जिसने 9 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा।

चीन: ड्रैगन की भूख शांत नहीं हुई है; चीन ने लगातार 15वें महीने अपने रिजर्व में सोना बढ़ाया है।

अन्य खरीदार: मलेशिया, चेक गणराज्य, इंडोनेशिया और सर्बिया ने भी अपने भंडार में बढ़ोतरी की है।

बिक्री का मोर्चा: दूसरी ओर, रूस के केंद्रीय बैंक ने जनवरी में 9 टन सोना बेचकर सबको चौंका दिया है, जबकि बुल्गारिया ने भी 2 टन सोना कम किया है।

क्या डॉलर से मोहभंग खत्म हो रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट सिर्फ अस्थायी है। 2022 के बाद से केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए रणनीतिक रूप से गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और युद्ध जैसे हालातों के बीच सोना आज भी सबसे सुरक्षित निवेश माना जा रहा है। बाजार के पंडितों का कहना है कि जैसे ही कीमतें स्थिर होंगी, केंद्रीय बैंक फिर से बड़ी खरीदारी शुरू कर सकते हैं।

 

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