ज़हरीले रंगों की मंडी बना राजस्थान,: गुलाल के नाम पर बिक रहा 'पिसा पत्थर'; प्रशासन मौन, जनता की सेहत दांव पर
भीलवाड़ा। रंगों का त्योहार होली, धुलेंडी और शीतला सप्तमी करीब है, लेकिन इस बार भीलवाड़ा के साथ ही राजस्थान बाजारों में उमंग के साथ-साथ 'बीमारी' का सामान भी धड़ल्ले से परोसा जा रहा है। शहर के गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य बाजारों तक में घटिया, मिलावटी और जानलेवा गुलाल की बाढ़ आ गई है। हैरानी की बात यह है कि त्योहार की आड़ में चंद रुपयों के लालच में लोगों की आंखों की रोशनी और फेफड़ों से खिलवाड़ किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है।
गुलाल नहीं, मौत का पाउडर: अरारोट की जगह डोलोमाइट का खेल
कायदे से असली और सुरक्षित गुलाल अरारोट, टेलकम पाउडर या मैदा से तैयार किया जाता है, जो त्वचा के लिए सौम्य होता है। लेकिन मुनाफाखोरों ने इसका खौफनाक विकल्प ढूंढ लिया है। भीलवाड़ा और आसपास के इलाकों में गुलाल के नाम पर पिसे हुए पत्थर (डोलोमाइट और मार्बल पाउडर) में चमकीला रंग और तेज खुशबू मिलाकर बेचा जा रहा है। यह 'पत्थर वाला गुलाल' दिखने में तो आकर्षक है, लेकिन इसके परिणाम बेहद घातक हैं।
7 रुपये का पत्थर, 40 रुपये में 'ज़हर'
मुनाफे का गणित इतना गंदा है कि मात्र 7 से 10 रुपये प्रति किलो मिलने वाला पत्थर का पाउडर, रंग चढ़ने के बाद बाजार में 30 से 40 रुपये किलो तक बिक रहा है। कम कीमत के चक्कर में आम जनता इस ज़हर को खरीद रही है, जबकि दुकानदार अपना घर भरने के लिए लोगों की सेहत की बलि चढ़ा रहे हैं।
डॉक्टरों की चेतावनी: जा सकती है आंखों की रोशनी
चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस मिलावटी गुलाल को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।आंखों के लिए खतरा: पत्थर के बारीक कण यदि आंखों में चले जाएं, तो वे कॉर्निया को बुरी तरह छील सकते हैं, जिससे आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
फेफड़ों की बीमारी: हवा में उड़ता यह पत्थर वाला गुलाल जब सांस के जरिए शरीर के अंदर जाता है, तो यह फेफड़ों में जमा हो जाता है, जिससे अस्थमा और सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
स्किन एलर्जी: इसमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल युक्त रंग त्वचा पर रैशेज, खुजली और गहरे घाव पैदा कर रहे हैं।
सूंघकर और पानी में घोलकर करें टेस्ट
गुलाल खरीदने से पहले उसकी हल्की सी खुशबू जरूर लें। अगर खुशबू तेज और केमिकल जैसी लगे, तो यह सतर्क रहने का संकेत है। ऑर्गेनिक या हर्बल गुलाल की खुशबू आमतौर पर हल्की और प्राकृतिक होती है। दूसरा तरीका है पानी टेस्ट। थोड़ा सा गुलाल गिलास पानी में डालें। अगर रंग आसानी से घुल जाए और नीचे कोई भारी कण न जमा हो, तो यह बेहतर संकेत है। लेकिन अगर रंग ऊपर तैरता रहे या नीचे कचरे जैसे कण बैठ जाएं, तो इसे इस्तेमाल न करें। यह मिलावट की निशानी हो सकती है।
हाथ पर रगड़कर और लेबल पढ़कर पहचानें असली गुलाल
थोड़ा सा गुलाल हथेली पर लेकर रगड़ें। असली और सुरक्षित गुलाल बेहद मुलायम महसूस होता है। अगर इसमें दरदरे कण या चमकते कण नजर आएं, तो यह स्किन के लिए हानिकारक हो सकता है। पैकेट पर लिखी सामग्री भी ध्यान से पढ़ें। सिर्फ “हर्बल” लिखा होना पर्याप्त नहीं है। सामग्री में हल्दी, चंदन, फूलों का पाउडर या अन्य प्राकृतिक चीजों का उल्लेख होना चाहिए। भरोसेमंद ब्रांड से ही खरीदारी करना सुरक्षित रहेगा।
अनदेखी पर उठ रहे सवाल
शहर में खुलेआम बिक रहे इस ज़हरीले गुलाल पर अब तक किसी भी विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। न तो सैंपलिंग हो रही है और न ही अवैध रूप से पत्थर पीसकर गुलाल बनाने वाली इकाइयों पर छापेमारी। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? भीलवाड़ा हलचल जनता से अपील करता है कि केवल विश्वसनीय दुकानों से ही 'हर्बल' या जांचा हुआ गुलाल खरीदें और अपनी खुशियों को मातम में न बदलने दें।
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