पैरासिटामॉल समेत 90 दवा नमूने फेल, डीसीजीआई का राज्यों को सख्त निर्देश
नई दिल्ली |देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़ी कार्रवाई करते हुए भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने अप्रमाणित फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। नियामक ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों को 90 एफडीसी दवाओं की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार 2025 के सुगम लैब परीक्षण डाटा में बड़ी संख्या में दवाओं के सैंपल अप्रमाणित पाए गए हैं, जिन्हें नई दवा की श्रेणी में रखा गया है। नियमों के मुताबिक, किसी भी नई दवा का निर्माण और बिक्री बिना केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण की अनुमति के नहीं की जा सकती।
ये दवाएं जांच के घेरे में
जांच के दायरे में आने वाली दवाओं में मल्टीविटामिन, फोलिक एसिड, सिरप, पैरासिटामोल, क्लोट्रिमाज़ोल और बेटामेथासोन क्रीम, डाइक्लोफेनाक पोटेशियम और डाइसाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट्स समेत अन्य शामिल हैं।
डीसीजीआई से राज्यों को भेजे पत्र में कहा गया कि आपूर्ति शृंखला में अप्रमाणित दवाओं की मौजूदगी सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और उससे जुड़े नियमों के उल्लंघन का भी संकेत है। डीसीजीआई ने संबंधित निर्माताओं, विपणनकर्ताओं और अन्य हितधारकों के खिलाफ जांच शुरू कर उचित नियामकीय कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही, ऐसी दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी निर्माता ने नई दवा की अनुमति के लिए आवेदन किया है, तो उसकी प्रति उपलब्ध कराई जाए। राज्यों से इस मामले में त्वरित कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) भी मांगी गई है। जनहित को देखते हुए इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं
