शिक्षा के भगवाकरण का आरोप: कांग्रेस ने एनसीईआरटी मामले में सुप्रीम कोर्ट से की विस्तृत जांच की मांग

Update: 2026-02-27 08:28 GMT

नई दिल्ली/भीलवाड़ा | एनसीईआरटी (NCERT) की कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर छिड़े विवाद ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने स्वयं पाठ्यपुस्तकों के पुनर्लेखन के लिए 'नागपुर सांप्रदायिक पारिस्थितिकी तंत्र' (Nagpur Communal Ecosystem) का मार्गदर्शन किया है, जिसे उन्होंने 'वास्तविक एनसीईआरटी' करार दिया।

जयराम रमेश के गंभीर आरोप

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि पिछले एक दशक में पाठ्यपुस्तकों में जानबूझकर वैचारिक बदलाव किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा को ध्रुवीकरण और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माध्यम बना दिया गया है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विस्तृत जांच कराने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त कार्रवाई: पुस्तक पर पूर्ण रोक

यह राजनीतिक विवाद तब शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण रोक लगा दी। अदालत ने पुस्तक में न्यायपालिका को लेकर शामिल की गई 'आपत्तिजनक सामग्री' पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।

जब्ती के निर्देश: शीर्ष अदालत ने पुस्तक की सभी भौतिक और डिजिटल प्रतियों को तत्काल प्रभाव से जब्त करने और सार्वजनिक पहुंच से हटाने के निर्देश दिए हैं।

कारण बताओ नोटिस: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने एनसीईआरटी निदेशक और स्कूली शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर पूछा है कि इस गंभीर चूक के जिम्मेदार लोगों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

सरकार और एनसीईआरटी का रुख

विवाद बढ़ता देख केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी चिंता जताई है। उन्होंने आश्वस्त किया है कि मसौदा तैयार करने वालों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और कठोर कार्रवाई होगी। वहीं, एनसीईआरटी ने अदालत की टिप्पणियों के बाद विवादित सामग्री के लिए खेद जताया है और पुस्तक को अपनी वेबसाइट से हटाकर संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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