नए वित्तीय वर्ष में सिगरेट‑तंबाकू पर उच्च टैक्स, जानिए कब से होगा लागू

Update: 2026-01-01 10:14 GMT

नई दिल्ली |केंद्र सरकार ने देश में तंबाकू नियंत्रण और राजस्व ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। यह नई कर व्यवस्था 1 फरवरी, 2026 से प्रभावी होगी, जो धूम्रपान करने वालों की जेब पर सीधा असर डालेगी। 

उत्पाद की लंबाई के आधार पर तय हुआ शुल्क

सरकार ने सिगरेट की लंबाई और उसके प्रकार को आधार बनाकर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क निर्धारित किया है। नए नियमों के तहत, प्रति 1,000 सिगरेट पर अतिरिक्त शुल्क की सीमा 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक तय की गई है। यह वर्गीकरण प्रीमियम और साधारण सिगरेट के बीच कर के अंतर को स्पष्ट करता है।

40% जीएसटी के ऊपर लगेगा अतिरिक्त टैक्स

महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नया उत्पाद शुल्क कोई स्वतंत्र टैक्स नहीं है, बल्कि यह तंबाकू उत्पादों पर पहले से लागू 40 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) के अतिरिक्त देय होगा। हाल ही में संसद द्वारा पारित 'केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025' के माध्यम से इस बदलाव को कानूनी रूप दिया गया है।


इस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की समय सीमा समाप्त होने के बाद पैदा होने वाली राजस्व की कमी को पूरा करना और शुल्क ढांचे को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

राज्यों के साथ साझा होगा राजस्व: वित्त मंत्री

संसद में इस विषय पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि इस माध्यम से एकत्र किया गया राजस्व 'विभाजित किए जाने वाले कोष' का हिस्सा बनेगा। उन्होंने कहा, "उत्पाद शुल्क कोई उपकर नहीं है। एकत्रित राजस्व को 41 प्रतिशत की निर्धारित दर से राज्यों के साथ साझा किया जाएगा।"

वित्त मंत्री ने आगे तर्क दिया कि जीएसटी से पहले भी तंबाकू उत्पादों पर वार्षिक आधार पर कर बढ़ाए जाते थे। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश महंगाई के साथ या स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण हर साल तंबाकू करों में वृद्धि करते हैं। भारत में इस वृद्धि का मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू की लत से दूर रखना और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

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