प्रतापगढ़ में पुलिस पर गंभीर आरोपों को लेकर जनआक्रोश, हजारों की भीड़ ने एसपी कार्यालय का किया घेराव
प्रतापगढ़/पिपलिया स्टेशन (निप्र)। समीपस्थ राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में कथित पुलिस बर्बरता, फर्जी एनडीपीएस प्रकरण, अवैध वसूली और निर्दाेष नागरिकों को प्रताड़ित किए जाने के आरोपों को लेकर प्रतापगढ़ में जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला। वार्ड क्रमांक 34 के पार्षद शाकिर शेख द्वारा प्रतापगढ़ कोतवाली के तत्कालीन थानाधिकारी दीपक बंजारा, कांस्टेबल राजवीर, रमेश उर्फ गजनी सहित अन्य पुलिसकर्मियों और कथित फर्जी पुलिसकर्मियों पर लगाए गए गंभीर आरोपों के विरोध में सोमवार को जिले का अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व प्रतापगढ़ के पूर्व विधायक रामलाल मीणा एवं मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ किसान नेता श्यामलाल जोकचन्द ने किया। प्रदर्शन में हजारों की संख्या में किसान, कांग्रेस कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं आम नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने शहर में पैदल मार्च करते हुए जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। ज्ञापन और प्रदर्शन का मुख्य आधार 31 दिसंबर 2025 की रात की वह घटना है, जिसे लेकर पुलिस पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जानलेवा हमला कर सोना व नकदी लूटने का आरोप:-
पार्षद शाकिर शेख द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, रात करीब 1.22 बजे हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों एवं सिविल वेश में आए कुछ लोगों ने जिला चिकित्सालय के पीछे स्थित अब्दुल हमीद के मकान का दरवाजा तोड़कर जबरन प्रवेश किया। आरोप है कि सबसे पहले नीचे सो रहे लोकेश शर्मा के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, इसके बाद ऊपर कमरे में सो रहे अब्दुल हमीद को सब्बल, लाठियों, लोहे के पाइप और बेसबॉल डंडों से पीटा गया। मारपीट इतनी भयावह थी कि अब्दुल हमीद का एक हाथ और एक पैर टूट गया, साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। परिजनों का दावा है कि हमलावरों ने घर में लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए, अलमारियों और कमरों में तोड़फोड़ की तथा 6 से 7 तोला सोना, लगभग 1 लाख 80 हजार रुपये नकद, मोबाइल फोन, एलईडी टीवी और डीवीआर लूटकर ले गए। आरोप यह भी है कि घटना के बाद घर में फैले खून को साफ कर दिया गया और डीवीआर उठाकर ले जाकर महत्वपूर्ण सबूत नष्ट किए गए। घटना को लेकर सबसे बड़ा विवाद उस समय खड़ा हुआ जब इसी रात पुलिस द्वारा थाना अरनोद में दर्ज एनडीपीएस प्रकरण क्रमांक 54/2025 में अब्दुल हमीद की गिरफ्तारी दर्शा दी गई। परिजनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह फर्जी और साजिश के तहत दिखाई गई है, ताकि मारपीट और लूट की घटना से ध्यान हटाया जा सके। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुराने पूछताछ दस्तावेजों में कूटरचना कर नाम जोड़ा गया तथा डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई। प्रदर्शनकारियों ने पूरे एनडीपीएस प्रकरण की जांच जिले से बाहर के किसी निष्पक्ष अधिकारी से कराने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं:-
31 दिसंबर की रात हुई मारपीट, लूट और अवैध प्रवेश की घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कठोर कार्रवाई तथा संबंधित थानाधिकारी को हटाया जाए। जिले के अफीम किसानों से एनडीपीएस धाराओं का भय दिखाकर की जा रही कथित अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगाई जाए। यातायात पुलिस एवं अन्य चेकिंग पॉइंट्स पर गरीब और आमजन से की जा रही अवैध वसूली बंद कराई जाए।
नेताओं ने दिया आंदोलन तेज करने का अल्टीमेटम:-
पूर्व विधायक रामलाल मीणा ने कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई और दोषी पुलिस अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया गया तो आंदोलन को जिले से राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस का भय दिखाकर किसानों और आम नागरिकों को प्रताड़ित करना लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है। वहीं किसान नेता श्यामलाल जोकचन्द ने कहा कि अफीम किसानों को झूठे मामलों में फंसाने और अवैध वसूली की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
प्रशासन का आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक गजेंद्रसिंह मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
