पीएम मोदी ने ‘ज्ञान भारतम’ पोर्टल लॉन्च किया, पांडुलिपियों को डिजिटल जीवन
नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पांडुलिपि धरोहर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ज्ञान भारतम पोर्टल की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने ज्ञान भारतम मिशन के तहत भारत की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण की बात पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि ये पांडुलिपियां भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत की जीवित धरोहर हैं, जो हमारी विविधता में एकता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 80 भाषाओं में लिखी गई ये पांडुलिपियां ज्ञान का एक विशाल समुद्र हैं। इनमें संस्कृत, प्राकृत, असमिया, बंगाली, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मराठी जैसी भाषाएं शामिल हैं। उन्होंने गिलगित पांडुलिपि का उदाहरण देते हुए बताया कि ये कश्मीर के इतिहास की असली जानकारी देती है।
बता दें कि ज्ञान भारतम एक डिजिटल मंच है, जिसका उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण, डिजिटलीकरण और उनके पारंपरिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना है। इस सम्मेलन का विषय पांडुलिपि धरोहर के माध्यम से भारत की ज्ञान परंपरा की पुनर्प्राप्ति है, जो कि 11 से 13 सितंबर तक संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया है।
भारत की पांडुलिपियां मानवता की यात्रा को दर्शाती हैं- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की पांडुलिपियां मानवता की यात्रा को दर्शाती हैं, जिसमें दर्शन, विज्ञान, चिकित्सा, खगोलशास्त्र, वास्तुकला जैसे कई विषय शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गणित से लेकर कंप्यूटर साइंस तक, आधुनिक ज्ञान की नींव भारत की खोजों जैसे शून्य के आविष्कार पर टिकी है। उन्होंने इसे भारत की सभ्यता की अमूल्य धरोहर बताया, जिसे पूरी दुनिया में गर्व के साथ दिखाया जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने यह भी बताया कि प्राचीन समय में लोग ज्ञान को सबसे बड़ा दान मानकर पांडुलिपियाँ दान करते थे। आज जरूरत है कि इस परंपरा को तकनीक की मदद से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन के तहत भारत ने थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों के विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम किया है, जहां पाली, लाना और चाम भाषाओं की पांडुलिपियों को पढ़ने के लिए शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने इस बात को लेकर जताई चिंता
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने चिंता जताई कि कुछ पारंपरिक ज्ञान को विदेशों में कॉपी कर पेटेंट कराया गया है, जिससे बौद्धिक चोरी हो रही है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण न सिर्फ इसका समाधान देगा बल्कि दुनिया को प्रामाणिक स्रोत भी उपलब्ध कराएगा। उन्होंने यह भी बताया कि ये डिजिटल पांडुलिपियाँ वैश्विक सांस्कृतिक और रचनात्मक उद्योग (जिसका मूल्य $2.5 ट्रिलियन है) को भी नई दिशा दे सकती हैं। ये डेटा-संचालित नवाचार और एआई तकनीकों के जरिए युवाओं के लिए रिसर्च और स्टार्टअप के नए अवसर बना सकती हैं।
क्या है ज्ञान भारतम पोर्टल?
ज्ञान भारतम एक डिजिटल गेटवे के रूप में काम करेगा, जो भारत के प्राचीन ज्ञान को दुनिया के सामने लाने में मदद करेगा। इसके तहत पूरे देश में फैली एक करोड़ से अधिक पांडुलिपियों को चिन्हित कर उन्हें डिजिटाइज, संरक्षित और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। ये पांडुलिपियां विश्वविद्यालयों, संग्रहालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहों में रखी गई हैं।
पोर्टल के लिए बने आठ विशेष समूह
ज्ञान भारतम पोर्टल के तहत बनाए गए आठ विशेष कार्य समूहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में अपने-अपने क्षेत्रों में हो रहे कार्यों की प्रस्तुति दी। ये समूह पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण तकनीक, मेटाडेटा मानकों के निर्धारण, कानूनी ढांचे के विकास, सांस्कृतिक कूटनीति, और प्राचीन लिपियों को पढ़ने व समझने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर काम करेंगे। इन कार्य समूहों का उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान धरोहर को संरक्षित कर डिजिटल रूप में भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
भारत की समृद्ध पांडुलिपि धरोहर
गौरतलब है कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी प्राचीन पांडुलिपियों की धरोहर मानी जाती है। देश में करीब एक करोड़ पांडुलिपियां हैं, जिनमें आयुर्वेद, गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन, संगीत, योग जैसे विषयों में गहरा ज्ञान समाया हुआ है। ऐसे में ज्ञान भारतम की पोर्टल की शुरुआत का उद्देश्य भारत की पांडुलिपियों में छिपा परंपरागत ज्ञान वैश्विक मंच पर पहुंचे और भारत फिर से वैश्विक ज्ञान परंपरा का मार्गदर्शक बने। यह पहल संस्कृति मंत्रालय के तहत एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है, जिससे भारत की ज्ञान परंपरा को विश्व में नई पहचान मिलेगी।
