'भीलवाड़ा सुर संगम 2026' का शानदार आगाज, भारतीय शास्त्रीय संगीत को संरक्षित रखने के प्रति कटिबद्ध: रवि झुनझुनवाला
नई दिल्ली। भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को समर्पित एलएनजे भीलवाड़ा समूह द्वारा आयोजित ‘भीलवाड़ा सुर संगम 2026’ के 13वें संस्करण का शनिवार को नई दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में शानदार आगाज हुआ। इस अवसर पर एलएनजे भीलवाड़ा समूह के चेयरमैन रवि झुनझुनवाला ने कहा कि हम भारतीय शास्त्रीय संगीत, संस्कृति और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने के प्रति कटिबद्ध हैं। कार्यक्रम के पहले दिन हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक भाग्येश मराठे ने अपनी शानदार प्रस्तुति से श्रोताओं को शुरुआत से अंत तक जोड़े रखा। इसके बाद कर्नाटक संगीत की प्रसिद्ध कलाकार और ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2024’ से सम्मानित डॉ. जयंती कुमारेश ने सरस्वती वीणा वादन प्रस्तुत कर माहौल को शांत और सुकून भरा बना दिया। बता दें कि डॉ. कुमारेश को इस वर्ष कर्नाटक संगीत के सर्वोच्च सम्मान ‘संगीता कलानिधि पुरस्कार 2026’ के लिए भी नामांकित किया गया है।
अपने विचार साझा करते हुए मराठे ने रियाज को आध्यात्मिक साधना बताया, वहीं डॉ. कुमारेश ने वीणा को ब्रह्मांडीय ध्वनि का स्वरूप कहा। उद्घाटन दिवस पर संगीत प्रेमियों की भारी उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह मंच नई पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह दो दिवसीय समारोह 5 अप्रैल को भी जारी रहेगा, जिसमें समान्वय सरकार और प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित मुकुल शिवपुत्र अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
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