प्रधानमंत्री मोदी ने RSS शताब्दी समारोह में कहा- राष्ट्र निर्माण की राह पर संघ की अमूल्य सेवा

Update: 2025-10-01 06:55 GMT

दिल्ली में संघ शताब्दी समारोह, स्मारक डाक टिकट और स्मृति सिक्का जारी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने संघ की 100 वर्ष की गौरवमयी यात्रा को याद किया और इसके योगदान को रेखांकित करते हुए विशेष डाक टिकट और स्मृति सिक्का जारी किया। 100 रुपए के स्मृति सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय चिन्ह और दूसरी ओर सिंह के साथ वरद-मुद्रा में भारत माता की भव्य छवि अंकित है। सिक्के पर संघ का बोध वाक्य भी अंकित है—“राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम।” पीएम मोदी ने इसे भारतीय मुद्रा पर भारत माता की पहली छवि बताया।

संघ की शाखाएं और राष्ट्र निर्माण

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ ने हमेशा राष्ट्र निर्माण की दिशा में काम किया। उन्होंने हेडगेवार जी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा, "जैसा है वैसा लेना है, जैसा चाहिए वैसा बनाना है।" उन्होंने बताया कि संघ सामान्य व्यक्ति को चुनकर राष्ट्र के लिए तैयार करता है और शाखा में व्यक्ति का सामाजिक, मानसिक और नैतिक विकास होता है। पीएम मोदी ने कहा कि संघ की हर धारा का उद्देश्य और भाव एक ही है—“राष्ट्र प्रथम।”

कठिन परिस्थितियों में भी संघ की अडिग यात्रा

प्रधानमंत्री ने बताया कि संघ ने अपने गठन के बाद से ही व्यक्ति निर्माण को राष्ट्र निर्माण का आधार माना। कठिन परिस्थितियों, प्रतिबंधों और षड्यंत्रों के बावजूद संघ ने कटुता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुजी को जेल तक भेजा गया, लेकिन उन्होंने कहा था कि कभी जीभ दांतों के नीचे दब सकती है, लेकिन दांत नहीं टूटते। संघ के स्वयंसेवक समाज सेवा में निरंतर लगे रहे और देश को सशक्त बनाने का कार्य किया।

महानवमी और विजयादशमी के पर्व पर संदेश

पीएम मोदी ने देशवासियों को महानवमी और नवरात्रि की शुभकामनाएं दी। उन्होंने विजयादशमी को अन्याय पर न्याय, असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की जीत के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना 100 वर्ष पूर्व इसी राष्ट्र चेतना और भारतीय संस्कृति के मूल्यों के पुनरुत्थान के लिए हुई थी।

स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने स्मारक डाक टिकट और 100 रुपए के स्मृति सिक्के के माध्यम से संघ के योगदान को दर्शाया। उन्होंने कहा कि संघ एक ऐसी भूमि है जहां स्वयंसेवक अहं से वयं की यात्रा शुरू करता है और शाखा में उसके मन में राष्ट्र निर्माण का भाव पनपता है।

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