एक महीने छोड़ दीजिए गेहूं की रोटी खाना...फिर देखिए....

Update: 2024-12-29 06:50 GMT

 खाने में किसी भी रूप में ग्लूटन न मौजूद हो, तो वह ग्लूटन फ्री डाइट कहलाती है। ग्लूटन एक प्रोटीन होता है, जो गेहूं और अन्य कई अनाज में पाया जाता है। ये एक तरह का बाइंडिंग और फ्लेवरिंग एजेंट होता है, जो कि नेचुरली कुछ फूड्स में पाया जाता है।

सेलियक डिजीज और ग्लूटन सेंसिटिविटी से जूझ रहे लोगों को ग्लूटन फ्री डाइट का सेवन करना चाहिए। ऐसे लोगों में ग्लूटन खाते ही एक इम्यून रिएक्शन ट्रिगर होता है, जिससे इनकी आंतों और अन्य पाचन तंत्र के हिस्सों में इन्फ्लेमेशन और संक्रमण शुरू हो जाता है। यही कारण है कि अधिकतर लोग ग्लूटन फ्री डाइट की तरफ स्विच करते जा रहे हैं।

 अगर आपको इस बात का संशय है कि मुझे कोई व्हीट एलर्जी है या नहीं, तो इसे पता लगाने के टेस्ट भी किए जाते हैं। अगर आप नियमित रूप से पेट संबंधी समस्याओं से तंग रहते हैं, तो एक महीने गेहूं के आटे की रोटी खाए बिना रह कर देखें। संभव है कि आपको अपने अंदर कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

 

आइए जानते हैं क्या हैं वो बदलाव

कम ब्लोटिंग- ग्लूटन युक्त फूड्स खाने से अधिक ब्लोटिंग और गैस बनती है। इसलिए जब ग्लूटन फ्री डाइट लेते हैं, तो पाचन तंत्र पर कम दबाव पड़ता है और ब्लोटिंग जैसी समस्या से राहत मिलती है।

जोड़ों के दर्द में कमी- ग्लूटन असामान्य तरीके से इम्यून रिएक्शन कर सकता है, जिससे शरीर में इन्फ्लेमेशन बढ़ता है और जोड़ों का दर्द शुरू हो सकता है।

कम डिप्रेशन- रिसर्च के अनुसार, ग्लूटन फ्री डाइट लेने वालों में अगर डिप्रेशन के लक्षण पहले से मौजूद थे, तो उसमें कमी पाई गई है।

स्किन हेल्थ में सुधार- ग्लूटन से एलर्जी होने पर एक्जिमा और सोरायसिस जैसी स्किन संबंधी समस्याएं होना आम होती हैं। इसलिए ऐसे में ग्लूटन फ्री डाइट लेने पर स्किन हेल्थ में सुधार पाया गया है।

सिरदर्द में कमी- गट और ब्रेन के कनेक्शन बहुत करीबी है। अगर गट हेल्थ अच्छी नहीं है, तो लगातार सिरदर्द की समस्या बनी रह सकती है।

 बढ़ा हुए एनर्जी लेवल- ग्लूकोज इनटोलरेंस के मामले में एनर्जी लेवल हर समय लो महसूस होता है। ऐसे में एक महीने तक ग्लूटन फ्री डाइट लेने से एनर्जी लेवल स्पाइक होता हुआ महसूस होगा और हर समय रहने वाली थकान की समस्या भी दूर होगी।

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