किन आदतों के कारण महिलाएं हो जाती हैं बांझपन का शिकार, कैसे इस समस्या से बचें
देश में बांझपन की समस्या काफी बढ़ रही है. डब्लयूएचओ के मुताबिक़ भारत में इनफ़र्टिलिटी की दर 3.9 से 16.8 प्रतिशत के बीच है. WHO के मुताबिक, अगर एक कपल संतान के लिए12 महीने या उससे ज़्यादा समय तक नियमित तौर पर असुरक्षित संबंध बनाते हैं और इसके बाद भी महिला को गर्भधारण नहीं होता है तो इसे बांझपन माना जाता है. अब कम उम्र में भी महिलाओं में यह समस्या देखी जाती है. बांझपन क्यों होता है और इससे बचाव कैसे करें इस बारे में एम्स नई दिल्ली से एमडी और सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट, लेप्रोस्कोपिक सर्जन और फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. वैशाली शर्मा ने ने बताया है .
डॉ. वैशाली ने कहा कि आज के समय में लाइफस्टाइल में बदलाव, प्रदूषण और मेडिकल कंडीशंस के कारण बांझपन के मामले बढ़ रहे हैं. पीसीओएस , एंडोमेट्रियोसिस, थायराइड की बीमारी, डायबिटीज और मोटापा जैसी स्थितियां भी बांझपन का कारण बन सकती हैं. अब केवल महिलाओं ही नहीं बल्कि पुरुषों में भी बांझपन बढ़ रहा है. पुरुषों में शुक्राणु की संख्या में कमी और इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी समस्याओं में भी इजाफा हो रहा है.
बांझपन का इलाज कैसे किया जाता है?
डॉ वैशाली कहती हैं कि अगर किसी कपल को बांझपन होता है तो पहले दवाएं देकर फिर प्राकृतिक तरीक़े से कंसीव कराने की कोशिश की जाती है. अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो फिर इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन किया जाता है. अगर इससे भी बच्चा कंसीव न हो तो फिर आईवीएफ़. का सहारा लिया जाता है. अब मेडिकल सांइस में और भी प्रगति हो गई है.
अब एग फ्रीजिंग और सरोगेसी से भी बच्चा कंसीव कर सकते हैं.एग फ्रीजिंग में महिलाओं के एग को युवावस्था में फ्रीज कर दिया जाता है. बाद में, जब वे गर्भधारण करने का फैसला करती हैं, तो एग को डीफ्रीज किया जा सकता है और आईवीएफ में उपयोग किया जा सकता है. बीते कुछ सालों में आईवीएफ का चलन काफी बढ़ा है. कई मामलों में इससे बच्चा कंसीव करने में मदद भी मिल रही है.
बांझपन से बचाव कैसे करें
खानपान का ध्यान रखें
स्मोकिंग और शराब का सेवन न करें
गर्भनिरोधक दवाओं के सेवन से बचें
लाइफस्टाइल को ठीक रखें
सोने और जगने का समय निर्धारित करें
रोज कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज जरूर करें