बच्चों में बार-बार खांसी: सामान्य बीमारी या एलर्जी? जानें विशेषज्ञों की राय और बचाव के तरीके

Update: 2026-03-06 01:00 GMT

  बदलते मौसम और बढ़ते प्रदूषण के बीच इन दिनों बच्चों में बार-बार खांसी होने की समस्या आम देखी जा रही है। कई माता-पिता इसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या बिना डॉक्टरी सलाह के कफ सिरप देने लगते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Pediatricians) के अनुसार, बच्चों में बार-बार होने वाली खांसी केवल एक संक्रमण नहीं, बल्कि एलर्जी या अस्थमा का शुरुआती संकेत भी हो सकती है।

बीमारी  और एलर्जी  में फर्क कैसे पहचानें?

विशेषज्ञों ने दोनों स्थितियों के बीच अंतर करने के कुछ मुख्य लक्षण बताए हैं:

संक्रमण (Infection): यदि खांसी के साथ बुखार, गले में दर्द, नाक बहना और सुस्ती महसूस हो, तो यह वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है। यह आमतौर पर 1 से 2 सप्ताह में ठीक हो जाता है।

एलर्जी (Allergy): यदि बच्चे को बिना बुखार के खांसी हो रही है, आंखों से पानी आ रहा है, बार-बार छींकें आ रही हैं और रात के समय या सुबह उठते ही खांसी बढ़ जाती है, तो यह एलर्जी के लक्षण हैं। यह धूल, पालतू जानवरों के बाल, पराग कण (Pollen) या प्रदूषण के कारण हो सकती है।

इन बातों पर दें विशेष ध्यान:

रात की खांसी: यदि बच्चा सोते समय अचानक खांसने लगता है या उसकी सांसों से 'सीटी' जैसी आवाज (Wheezing) आती है, तो यह बचपन के अस्थमा का संकेत हो सकता है।

लंबे समय तक खांसी: अगर खांसी 3 सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहती है, तो इसे 'क्रोनिक कफ' माना जाता है और इसके लिए विशेषज्ञ जांच जरूरी है।

बदलता मौसम: राजस्थान में धूल भरी हवाएं और तापमान में बदलाव बच्चों की श्वसन नली में सूजन (Inflammation) पैदा कर देते हैं, जिससे एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है।

बचाव के उपाय:

बच्चों को धूल-मिट्टी और धुएं से दूर रखें।

घर में सॉफ्ट टॉयज और पुराने कालीनों की सफाई का विशेष ध्यान दें, क्योंकि इनमें 'डस्ट माइट्स' पनपते हैं।

ठंडी चीजों और खट्टे खाद्य पदार्थों से परहेज कराएं।

भाप (Steam) देना एक प्रभावी घरेलू उपचार है, लेकिन किसी भी प्रकार का इनहेलर या दवा विशेषज्ञ की सलाह के बिना न दें।

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