होली के रंग और रासायनिक एलर्जी: खुशियों के पर्व पर सावधानी है जरूरी – डॉ. निर्मला शर्मा की सलाह

Update: 2026-03-01 09:08 GMT


भीलवाड़ा। रंगों का त्योहार होली खुशियों और उमंग का प्रतीक है, लेकिन बाजार में उपलब्ध हानिकारक रसायनों से युक्त रंग इस उत्सव के आनंद को किरकिरा कर सकते हैं। प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. निर्मला शर्मा (BHMS, NDDY, MD, PhD) ने होली पर रासायनिक एलर्जी से बचाव और उपचार को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए हैं।

रसायनों से बढ़ रहा है सेहत का खतरा

डॉ. शर्मा के अनुसार, आजकल बाजार में मिलने वाले सस्ते रंगों में सीसा (Lead), क्रोमियम और अन्य घातक रसायन मिलाए जाते हैं। ये रसायन त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, जलन, आंखों में सूजन, बालों का झड़ना और श्वसन तंत्र में तकलीफ जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय:

प्राकृतिक रंगों का चयन: फूलों, हल्दी, चंदन या हर्बल रंगों का ही उपयोग करें।

तेल का सुरक्षा कवच: रंग खेलने से पहले त्वचा और बालों पर सरसों या नारियल का तेल अच्छी तरह लगाएं।

सुरक्षात्मक गियर: आंखों के बचाव के लिए चश्मा पहनें और चेहरे पर सीधे केमिकल वाले रंग न लगने दें।

त्वरित सफाई: रंग खेलने के बाद गुनगुने पानी और सौम्य साबुन से स्नान कर त्वचा साफ करें।

एलर्जी में होम्योपैथी का प्रभावी समाधान

डॉ. निर्मला शर्मा ने बताया कि होम्योपैथी में व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार उपचार उपलब्ध है, जो शरीर की संवेदनशीलता को कम करता है। यदि रंग से एलर्जी, सांस की तकलीफ या त्वचा रोग की समस्या होती है, तो होम्योपैथिक दवाइयाँ बेहद कारगर सिद्ध होती हैं। बार-बार एलर्जी से परेशान रहने वाले लोग त्योहार से पूर्व भी चिकित्सीय परामर्श ले सकते हैं।

निष्कर्ष: थोड़ी सी सावधानी और प्राकृतिक रंगों के चयन से हम होली को सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से मना सकते हैं।

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