राजस्थान सरकार ने एमडी/एमएस डॉक्टरों के लिए सर्विस बॉन्ड राशि में की भारी वृद्धि

Update: 2025-09-04 04:58 GMT

भीलवाड़ा , भीलवाड़ा का मेडिकल कालेज हो या फिर प्रदेश का राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमडी-एमएस करने के बाद प्रदेश में सरकारी नौकरी नहीं करने वाले डॉक्टरों को  मंहगा  पड़ेगा। सरकार ने  डॉक्टरों के सर्विस बॉन्ड की राशि में पांच गुना तक की बढ़ोत्तरी कर दी है।इस कदम का उद्देश्य प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना है। हालांकि, यह नीति युवा डॉक्टरों के लिए वित्तीय और व्यावसायिक चुनौतियां खड़ी कर सकती है, जिससे इस पर बहस तेज होने की संभावना है।

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी कर  राजस्थान सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमडी-एमएस करने वाले डॉक्टरों पर सख्ती बढ़ाते हुए सर्विस बॉन्ड की राशि में पांच गुना तक की वृद्धि की है, ताकि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर किया जा सके। इस कदम से चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा प्रयास किया गया है, लेकिन यह डॉक्टरों के लिए महंगा साबित हो सकता है।

नए आदेश के अनुसार, स्किन, रेडियोलॉजी, गायनी और जनरल मेडिसिन जैसे विषयों के लिए बॉन्ड राशि 30 लाख से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दी गई है। बायोकेमेस्ट्री, फॉरेंसिक मेडिसिन, एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, फार्माकॉलोजी और पीएसएम के लिए राशि 5 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये की गई है। हड्डी रोग, शिशु रोग, टीबी एंड चेस्ट, नेत्र रोग, ट्रॉमेटोलॉजी, जनरल सर्जरी और फिजियाट्री के लिए बॉन्ड राशि 20 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। वहीं, ईएनटी, इमरजेंसी मेडिसिन, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, निश्चेतना, पेलिएटिव मेडिसिन, पैथोलॉजी, फिजिकल मेडिसिन एंड रिहेबिलिटेशन, और माइक्रोबायोलॉजी जैसे विषयों के लिए राशि 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है।

चिकित्सा शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए उठाया गया है। इस नीति से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने की उम्मीद है, लेकिन डॉक्टरों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को लेकर बहस भी तेज हो सकती है। यह कदम चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर नजर रखना जरूरी होगा। 

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