जयपुर हाईकोर्ट का फैसला: नवोदय विद्यालय के मेस हेल्परों का नियमितीकरण अनिवार्य

Update: 2026-01-20 15:27 GMT


जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने नवोदय विद्यालयों में वर्षों से कार्यरत मेस हेल्परों को नियमित नियुक्ति देने का आदेश दिया है। जस्टिस आनंद शर्मा ने स्पष्ट कहा कि नवोदय विद्यालय केवल शिक्षा देने वाली संस्था नहीं, बल्कि एक संगठित संस्थान है, जहां नियमित श्रमिक काम करते हैं, इसलिए इसे श्रम कानूनों से बाहर नहीं रखा जा सकता।

मामला नवोदय विद्यालय, अजमेर का है, जहां धनराज चौधरी और अमर सिंह 1993 से सेवाएँ दे रहे थे। दशकों तक पूर्णकालिक काम करने के बावजूद उन्हें नियमित नियुक्ति नहीं मिली। लेबर कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए नियमितीकरण का आदेश दिया था, जिसे विद्यालय प्रशासन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

जस्टिस आनंद शर्मा ने कहा कि लंबे समय से लगातार और स्थायी कार्य करवा कर कर्मचारियों को अस्थायी रखना औद्योगिक विवाद अधिनियम का उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि NVS जैसे संस्थान में भोजन, सफाई और मेस प्रबंधन जैसी सेवाओं के लिए श्रमिक नियुक्त किए जाते हैं, इसलिए इसे उद्योग मानना उचित है।

हाईकोर्ट ने लेबर कोर्ट का आदेश बहाल करते हुए निर्देश दिया कि दोनों कर्मचारियों को 1993 से सेवा की निरंतरता मानते हुए नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उन्हें तीन वर्ष का बकाया वेतन, सभी वित्तीय लाभ, वरिष्ठता और पेंशन संबंधी अधिकार भी दिए जाएंगे। यह प्रक्रिया तीन माह में पूरी की जाएगी।

यह फैसला सरकारी स्कूलों और संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को श्रम कानूनों के समान अधिकार दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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