उदयपुर: रामकथा में साक्षात चमत्कार, पानी में तैरे रामेश्वरम के पत्थर; हनुमान जी की भक्ति देख भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

Update: 2026-04-12 12:47 GMT


उदयपुर। डोरे नगर (सेक्टर 3) स्थित सर्वेश्वर महादेव मंदिर में श्री राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित संगीतमय रामकथा के पांचवें दिन रविवार को श्रद्धालु साक्षात चमत्कार के साक्षी बने। कथा व्यास श्री पुष्कर दास महाराज के सानिध्य में जब राम सेतु निर्माण का प्रसंग आया, तो कथा प्रांगण में रामेश्वरम के वे पत्थर पानी में छोड़े गए जो तैरने लगे। यह देख पूरा पाण्डाल 'जय श्री राम' के जयकारों से गुंजायमान हो गया।

"प्रभु जिसे छोड़ दें, वो तो डूबेगा ही"

कथा के दौरान महाराज ने प्रभु राम और हनुमान जी के संवाद का सुंदर चित्रण किया। उन्होंने बताया कि जब वानर सेना राम नाम लिखकर पत्थर समुद्र में डाल रही थी और वे तैर रहे थे, तब प्रभु राम ने भी एक पत्थर पानी में डाला जो डूब गया। इस पर हनुमान जी ने मुस्कुराते हुए कहा, "प्रभु! आपके नाम के सहारे तो पूरी दुनिया तर जाती है, लेकिन जिसे आप स्वयं अपने हाथों से छोड़ दें, वह तो इस भवसागर में डूबेगा ही डूबेगा।"

जनक-सुनैना की सीख: सास-ससुर और गुरु की सेवा सर्वोपरि

महाराज ने सीता जी के त्याग और माता-पिता की सीख पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजा जनक और माता सुनैना ने बेटी को सबसे पहले सास, ससुर और गुरु की सेवा करने की शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि राम के 14 वर्ष के वनवास में सीता जी ने महलों के सुख को ठुकरा कर पति के साथ दुखों को सहना स्वीकार किया। महाराज ने सीख दी कि ईश्वर होकर भी जब राम-सीता को कष्ट सहने पड़े, तो साधारण मनुष्य को भी जीवन के हर सुख-दुख को सहज भाव से स्वीकार करना चाहिए।

केवट प्रसंग ने किया भावुक

कथा में केवट प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि कैसे प्रभु के चरण धोते ही केवट के मन के दुख, दोष और दरिद्रता मिट गई। महाराज ने कहा कि मनुष्य को हर हाल में प्रभु का सुमिरन करना चाहिए, क्योंकि कठिन समय केवल प्रभु की इच्छा और निमित्त मात्र होता है।

मंगलवार को होगी पूर्णाहुति

आयोजन में सर्वेश्वर महादेव विकास समिति के गोपाल सैनी, शिवशंकर गौड़, लव शर्मा, दामोदर सैनी, एस एल गुप्ता, देवी सिंह, केसर सिंह, लक्ष्मण सिंह, मनोज यादव सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे। संयोजक विट्ठल वैष्णव ने बताया कि रामकथा की पूर्णाहुति मंगलवार प्रातः 10 से 1 बजे के मध्य महाआरती के साथ संपन्न होगी।

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