हनुमानगढ़ में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 46 लाख रुपये ठगने वाले आरोपी गिरफ्तार
श्रीगंगानगर, ।राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का नाम लेकर एक बुजुर्ग व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर 46 लाख रुपये ऐंठ लिए थे। यह गिरफ्तारी चार महीने की लंबी जांच के बाद संभव हो पाई है। पुलिस अब आरोपी से ठगी की गई राशि बरामद करने के प्रयास में जुटी हुई है।
पुलिस अधीक्षक हरिशंकर ने आज बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान रामकिशोर सिहाग बिश्नोई (20) पुत्र बाबूराम बिश्नोई निवासी श्रीरामनगर सिहागों की ढाणी, पुलिस थाना जांबा, जिला फलोदी के रूप में हुई है। आरोपी को हनुमानगढ़ साइबर थाने की टीम ने गिरफ्तार किया। जांच के दौरान पता चला कि रामकिशोर के बैंक खाते में पिछले कुछ समय में पांच राज्यों से साइबर ठगी के लगभग 65 लाख रुपये जमा हुए थे। इनमें से कुछ राशि हनुमानगढ़ जंक्शन के वार्ड नंबर 48, सावन कॉलोनी निवासी पीड़ित राजेश कुमार गौड़ (66) से ठगी गई 46 लाख रुपये की रकम का हिस्सा भी शामिल है। विगत 14 अक्टूबर 2025 को राजेश कुमार गौड़ ने हनुमानगढ़ साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार अज्ञात ठगों ने मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच और ईडी का नाम लेकर राजेश को डराया-धमकाया और डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी। पीड़ित ने बताया कि 30 सितंबर 2025 को उसके मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से मुंबई क्राइम ब्रांच के नाम से कॉल आई। कॉल करने वाले ने दावा किया कि उनका आधार कार्ड से एक सिम जारी हुई है, जो अंधेरी ईस्ट, मुंबई में चल रही है। इस सिम का उपयोग विभिन्न व्यक्तियों को धमकी देने और केनरा बैंक में खाता खोलने में किया गया है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग की राशि ट्रांसफर हुई है।
ठग ने आगे कहा कि इस मामले में उनके खिलाफ मुंबई में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील विषय पर गलत कार्य करने के कारण उन्हें अरेस्ट करने के आदेश जारी हो चुके हैं।फिर 3 अक्टूबर को पीड़ित के व्हाट्सएप पर ईडी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के नाम का एक फर्जी अरेस्ट वारंट भी भेजा गया। इससे घबराकर राजेश ने दो दिनों के भीतर ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में 45 लाख 21 हजार 20 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
कुछ दिनों बाद जब राजेश को एहसास हुआ कि उसके साथ साइबर ठगी हुई है, तब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, जिसमें बैंक ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल्स और आईपी एड्रेस की ट्रैकिंग शामिल थी। चार महीने की मेहनत के बाद पुलिस को आरोपी रामकिशोर तक पहुंचने में सफलता मिली। पुलिस अधीक्षक हरिशंकर ने कहा कि आरोपी से पूछताछ जारी है और जल्द ही इस गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जाएगा।