मैत्री हो तो सुदामा और कृष्ण जैसी- पं. विकास नागदा

Update: 2026-01-29 14:22 GMT

 निंबाहेड़ा। श्री कल्लाजी वेदपीठ एवं शोध संस्थान के तत्वावधान में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव गुरुवार को कल्याणनगरी स्थित श्री कल्लाजी वेदपीठ परिसर में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक आयोजन का शुभारंभ माघ शुक्ल बसंत पंचमी शुक्रवार को हुआ था।

कथा वाचक गौनंदन पं. विकास नागदा ने संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भावपूर्ण वाचन करते हुए प्रत्येक दिन अलग अलग प्रसंगों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रथम दिवस श्रीमद्भागवत महात्म्य एवं मंगलाचरण का वर्णन किया गया। द्वितीय दिवस कुंती स्तुति और कपिल उपाख्यान प्रस्तुत किया गया। तृतीय दिवस सती चरित्र, जड़भरत एवं ध्रुव चरित्र सुनाया गया। चतुर्थ दिवस श्रीराम और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य वर्णन हुआ।

पंचम दिवस श्री बालकृष्ण लीलाओं एवं गोवर्धन पूजा प्रसंग ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। षष्ठम दिवस महारास लीला और रुक्मिणी मंगल का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किया गया। सप्तम एवं अंतिम दिवस पं. विकास नागदा ने कहा कि यदि सात दिन कथा सुनना संभव न हो तो एक दिन की कथा भी जीवन को धन्य बना देती है।

मित्रता के महत्व पर प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता संसार के लिए आदर्श है, जहां न धन का महत्व है और न गरीबी का बल्कि केवल प्रेम और सच्चे भाव ही मित्रता की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा मित्र वही होता है जो अपने मित्र के दुख को अपना मानकर उसे दूर करने का प्रयास करे। कथा में भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाहों और आठ प्रमुख पटरानियों का भी विशेष उल्लेख किया गया।

समापन अवसर पर फाग उत्सव का आयोजन हुआ जिसमें रसिया गीतों से वातावरण वृंदावनमय हो गया। श्रद्धालुओं को ऐसा प्रतीत हुआ मानो कल्याणनगरी में स्वयं वृंदावन की होली साकार हो उठी हो। राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग के साथ सप्तदिवसीय कथा का विधिवत विश्राम हुआ तथा भागवत जी का दशम स्कंध श्री कल्लाजी महाराज के चरणों में अर्पित किया गया।

ठाकुर श्री कल्लाजी का राजाधिराज स्वरूप में अलौकिक श्रृंगार

सप्तदिवसीय कथा महोत्सव के दौरान प्रतिदिन ठाकुर श्री कल्लाजी का प्रभु श्रीकृष्ण स्वरूप में आकर्षक और मनोहारी श्रृंगार किया गया। अंतिम दिवस उन्हें राजाधिराज स्वरूप में विशेष रूप से सजाया गया जो भक्तों के लिए अत्यंत मनमोहक और श्रद्धा से परिपूर्ण रहा। श्रद्धालुओं ने प्रभु से सुख समृद्धि और मंगलकामना की प्रार्थना की। मंदिर परिसर श्रृंगार दर्शन के दौरान भक्तिरस से सराबोर नजर आया।

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