मकर संक्रांति पर 'खूनी मांझे' पर पूर्ण प्रतिबंध:: पशुपालन मंत्री की भावुक अपील— "हमारी खुशी किसी बेजुबान की जान न ले"
जयपुर। मकर संक्रांति का त्योहार आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों और उमंग का प्रतीक है, लेकिन चाइनीज मांझे के कारण यह उत्सव अक्सर हादसों में बदल जाता है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने नायलॉन, सिंथेटिक और कांच या लोहे के चूर्ण से बने घातक चाइनीज मांझे के भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री जोराराम कुमावत की अपील: सूती धागे का ही करें प्रयोग
पशुपालन एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए एक विशेष अपील जारी की है। उन्होंने कहा, "त्योहार की खुशी तब अधूरी है जब वह किसी बेजुबान पक्षी या मासूम पशु के लिए दर्द का कारण बने। चाइनीज मांझे से हर साल हजारों पक्षी घायल होते हैं या असमय मौत के मुंह में चले जाते हैं। यह बेहद दुखद है।" उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे पतंगबाजी के लिए केवल सुरक्षित और वैकल्पिक सूती धागों (सादा धागा) का ही चयन करें।
कलेक्टरों को सख्त निर्देश: उल्लंघन पर होगी जेल
शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के क्रम में सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अलर्ट पर रखा गया है।
सख्त निगरानी: बाजारों में अवैध मांझे की बिक्री रोकने के लिए छापेमारी की जा रही है।
बचाव शिविर: घायल पक्षियों के उपचार के लिए सभी जिलों में विशेष पक्षी चिकित्सा एवं बचाव शिविर लगाए जाएंगे।
जनजागरूकता: विभाग द्वारा 'सुरक्षित पतंगबाजी' को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
इन घंटों में न उड़ाएं पतंग: पक्षियों के लिए 'नो फ्लाई ज़ोन'
पशुपालन विभाग ने पक्षियों की सुरक्षा के लिए एक समय-सीमा का सुझाव दिया है। लोगों से अपील की गई है कि:
सुबह 6 से 8 बजे और शाम 5 से 7 बजे के बीच पतंगबाजी से परहेज करें।
यह वह समय होता है जब पक्षी अपने घोंसलों से दाने के लिए निकलते हैं या वापस लौटते हैं। इस दौरान आसमान में पतंगों का जाल उनके लिए जानलेवा साबित होता है।
सुरक्षित संक्रांति के लिए मुख्य बिंदु:
चाइनीज मांझे का उपयोग और बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित।
केवल सूती या सादा धागे का ही उपयोग करें।
घायल पक्षी दिखने पर तुरंत स्थानीय बचाव टीम या कंट्रोल रूम को सूचित करें।
पक्षियों की आवाजाही के समय (सुबह और शाम) पतंगबाजी न करें।
"हमारा प्रयास है कि इस बार आसमान केवल पतंगों से सजे, पक्षियों के खून से नहीं। सुरक्षित तकनीक अपनाकर ही हम त्योहार की खुशियों को संजो सकते हैं।" — डॉ. समित शर्मा, शासन सचिव
