रामकथा में धूमधाम से मनाया राम जन्मोत्सव: बच्चियों को बचाना ही सबसे बड़ा पुण्य—पुष्कर दास महाराज

Update: 2026-04-10 14:56 GMT

 उदयपुर, । डोरे नगर (सेक्टर 3) स्थित सर्वेश्वर महादेव मंदिर में श्री राम दरबार प्राण प्रतिष्ठा एवं लक्ष्मी नारायण मंदिर पाटोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा के तीसरे दिन राम जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कथा व्यास श्री पुष्कर दास महाराज ने भगवान राम के प्राकट्य और उनके आदर्शों पर प्रकाश डाला।

मनुष्य जन्म और सत्संग का महत्व

महाराज ने कहा कि जो बहुत भाग्यशाली होते हैं, उन्हें ही मनुष्य जन्म और सत्संग में बैठने का अवसर मिलता है। उन्होंने हनुमान जी का उदाहरण देते हुए बताया कि वे बड़भागी थे जिन्हें प्रभु राम की सेवा का सौभाग्य मिला। महाराज ने चेताया कि धरती पर पाप बढ़ने के कारण प्रकृति रूठ रही है। उन्होंने सामाजिक विद्रूपताओं पर प्रहार करते हुए कहा कि आज के समय में नवरात्रि में कन्या पूजन के लिए 9 कन्याएं मुश्किल से मिलती हैं। बच्चियों को बचाना और उन्हें शिक्षित करना ही वर्तमान समय में सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है।

सती प्रसंग और भक्ति का मार्ग

कथा के दौरान भोले बाबा और सती के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि सती ने भगवान राम की परीक्षा ली, जिसके कारण उन्हें शिव से दूर होना पड़ा। रामायण में सती को पीहर पक्ष का अभिमान था। अंत में सती ने भगवान शिव को ही जन्म-जन्म के पति के रूप में पाने की कामना की। महाराज ने जोर देकर कहा कि रामायण ग्रंथ हर घर में होना चाहिए और राम का जन्म हमारे घट (हृदय) में होना चाहिए।

नृत्य और बधाई गान से गूंजा पाण्डाल

संयोजक विठ्ठल वैष्णव ने बताया कि राम जन्म के प्रसंग पर पाण्डाल "भये प्रगट कृपाला" के जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने एक-दूसरे को बधाई दी और ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर नृत्य किया। भगवान राम की मनमोहक बाल झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कलयुग में मन की निर्मलता के लिए कथा और भजन को ही सर्वश्रेष्ठ मार्ग बताया गया।

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