शीतला सप्तमी पर बाकरा में रंगों के बीच गूंजा कवि सम्मेलन, हास्य-व्यंग्य से झूमे ग्रामीण
शक्करगढ सांवरिया सालवी| क्षेत्र के बाकरा गाँव में शीतला सप्तमी और होली के पावन अवसर पर भक्ति, शक्ति और मनोरंजन का अनूठा संगम देखने को मिला। रंग-गुलाल के उल्लास के बीच गाँव के प्रसिद्ध चारभुजा मंदिर प्रांगण में एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कवियों ने अपनी हास्य-व्यंग्य और श्रृंगार रस की प्रस्तुतियों से पूरे माहौल को आनंदमय बना दिया।
चुनावी व्यंग्य और राजस्थानी गीतों की रही धूम
कवि सम्मेलन का आगाज़ कवि आशीष राज ने किया। उन्होंने स्थानीय राजनीति और सरपंच चुनाव की खींचतान पर अपनी तीखी मगर गुदगुदाती व्यंग्य रचनाएं पेश कीं, जिन्हें सुनकर ग्रामीण अपनी हंसी नहीं रोक पाए। इसके बाद मंच संभाला कवि मनीष राज ने, जिन्होंने राजनीति पर आधारित पैरोडी और मधुर श्रृंगार गीतों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे राष्ट्रीय कवि राजकुमार बादल। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में राजस्थानी लोक संस्कृति की खुशबू बिखेरते हुए होली गीत “साजन था बिन अबके होली मोली मोली लाग री” सुनाया। बादल ने अपनी हास्य रचनाओं के साथ-साथ युवाओं को आपसी प्रेम, भाईचारा और सामाजिक एकता बनाए रखने का सशक्त संदेश भी दिया।
प्रमुख हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस सांस्कृतिक संध्या में क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान सरपंच प्रतिनिधि वीरेंद्र मीणा, पूर्व सरपंच सत्यनारायण शर्मा, कांग्रेस मंडल अध्यक्ष सत्यनारायण सेन, किशन सिंह, रामपाल शर्मा, कमलेश तेली, जेपी सालवी, शिव प्रजापत और दीपक गगरानी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
आयोजन में ग्रामीणों ने कवियों की हर प्रस्तुति पर तालियां बजाकर उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में सभी ग्रामीणों ने गाँव में प्रेम, सौहार्द और अटूट एकता बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया।
