फूलडोल में संतों का सत्याग्रह, युवा संत दिग्विजय राम ‘भेख बाहर’

Update: 2026-03-07 03:59 GMT


शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी

रामस्नेही संप्रदाय के विश्वप्रसिद्ध फूलडोल महोत्सव के बीच शुक्रवार को ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे धार्मिक आयोजन में हलचल मचा दी। करीब ढाई दर्जन से अधिक रामस्नेही संतों द्वारा संगत और पंगत का बहिष्कार किए जाने के बाद शुक्रवार को देर रात संप्रदाय के भेख भंडारी संत शंभुराम महाराज ने चित्तौड़गढ़ के युवा संत व कथा वाचक संत दिग्विजय राम गुरु रमताराम को अगले फूलडोल महोत्सव 2027 की पूर्णता तक के लिए “भेख बाहर” करने का आदेश जारी कर दिया।


संप्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्यश्री स्वामी रामदयाल महाराज के निर्देश और संतों के अनुरोध के बाद यह निर्णय लिया गया। आदेश के अनुसार इस अवधि के दौरान संत दिग्विजय राम रामस्नेही संप्रदाय की संगत और धार्मिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकेंगे।

गौरतलब है कि इस पूरे घटनाक्रम की खबर सबसे पहले शाहपुरा संवाद ने “रामस्नेही संप्रदाय में विवादः ढाई दर्जन संतों ने संगत-पंगत का किया बहिष्कार” शीर्षक से प्रकाशित की थी। इसके बाद यह मामला महोत्सव में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया और संत समाज में दिनभर हलचल बनी रही।

इस प्रकरण को लेकर शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे संतों का सत्याग्रह शुरू हुआ। सत्याग्रह में शामिल संतों ने स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब तक इस मामले में उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे संगत और पंगत में शामिल नहीं होंगे।

फूलडोल महोत्सव के दौरान संतों के लिए विशेष रूप से लगाई गई पंगत में भी इन संतों ने भाग नहीं लिया। इससे महोत्सव के माहौल में एक तरह की गंभीरता और चर्चा का दौर शुरू हो गया। महोत्सव में आए श्रद्धालु और संगत भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर उत्सुक नजर आए और दिनभर संतों के निर्णय की प्रतीक्षा करते रहे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए दिनभर संतों और संप्रदाय के जिम्मेदार पदाधिकारियों के बीच कई दौर की मैराथन बैठकें चलीं। इन बैठकों में संतों की नाराजगी दूर करने और संप्रदाय की मर्यादा बनाए रखने को लेकर गहन चर्चा हुई। आखिरकार देर शाम संत शंभुराम महाराज ने लिखित आदेश जारी करते हुए संत दिग्विजय राम गुरु रमताराम को अगले फूलडोल महोत्सव 2027 तक भेख बाहर करने का निर्णय सुनाया। आदेश जारी होते ही सत्याग्रह पर बैठे संतों ने इसे संत समाज की भावना के अनुरूप निर्णय बताते हुए अपना सत्याग्रह समाप्त कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के चलते फूलडोल महोत्सव में दिनभर संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच इसी विषय की चर्चा होती रही। हालांकि देर शाम निर्णय आने के बाद स्थिति सामान्य होती दिखाई दी और संतों ने भी राहत की सांस ली।

उल्लेखनीय है कि चित्तौड़गढ़ में एक हत्याकांड के मामले में वहां के संत रमताराम का नाम आने से उनको संप्रदाय से निष्कासित कर दिया। रामस्नेही संप्रदाय के तय मानकों, नियमों व परंपरा के मुताबिक रमता राम के शिष्य संत दिग्विजय राम के खिलाफ अन्य संतों के आक्रोश को देखते हुए आज यह निर्णय हुआ।

रामस्नेही संप्रदाय का फूलडोल महोत्सव देश-विदेश में अपनी धार्मिक परंपराओं और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे में महोत्सव के दौरान उत्पन्न हुए इस विवाद ने कुछ समय के लिए माहौल को जरूर गंभीर बना दिया, लेकिन अंततः संत समाज की आपसी सहमति और संप्रदाय की परंपरा के अनुसार समाधान निकलने से माहौल फिर शांत हो गया।

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