कादीसहना के किसानों का एडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन, फसल बीमा क्लेम व गिरदावरी में देरी का विरोध

By :  vijay
Update: 2025-09-13 06:27 GMT

शाहपुरा-पेसवानी शाहपुरा क्षेत्र के कादी सहना ग्राम पंचायत के किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा राशि के क्लेम भुगतान में देरी और फसल खराबे की शीघ्र गिरदावरी न किए जाने के खिलाफ शुक्रवार को शाहपुरा में एडीएम कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर कादी सहना ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष कन्हैया लाल शर्मा की अगुवाई में दर्जनों किसानों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए अपनी समस्याओं से अवगत कराया।

अपने ज्ञापन में किसानों ने बताया कि पिछले दो वर्षों से लगातार अतिवृष्टि के कारण उनकी फसलें लगभग 100 प्रतिशत तक खराब हो चुकी हैं। इसके साथ ही पशुओं के लिए चारे की भी भारी कमी हो गई है, जिससे किसानों को रोजी-रोटी चलाने में कठिनाई हो रही है और वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों से जीएसएस के माध्यम से फसल बीमा राशि कटौती की जाती है, लेकिन बीमा कंपनियां क्लेम के भुगतान के समय कई कठिन नियमों का हवाला देकर किसानों को उचित मुआवजा नहीं देतीं।

किसानों ने ज्ञापन में मांग की कि सरकार बीमा कंपनियों को पाबंद करे ताकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम राशि का भुगतान समय से सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा, खरीफ 2024 का फसल खराब अनुदान अभी तक नहीं मिला है, जबकि खरीफ 2025 में भी अतिवृष्टि के चलते भारी नुकसान हुआ है। किसानों ने अनुरोध किया कि सरकार द्वारा इस संबंध में अग्रिम कार्यवाही की जाए और शीघ्र ही फसलों की गिरदावरी कराकर उचित मुआवजा दिलाया जाए, ताकि उनका आर्थिक संकट कम हो सके।

ज्ञापन सौंपने के दौरान किसानों के साथ ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष कन्हैया लाल शर्मा की अगुवाई में जीएसएस डायरेक्टर भेरूलाल गाडरी, बालकिशन शर्मा, भगवान सिंह राणावत, अनिल जाट, मुकेश खारोल, छोटू बैरवा, नारू भील, मनोहर बैरवा, रामावतार आचार्य, भागचंद खारोल, महावीर माली, छीतर धोबी, शरीफ मोहम्मद, सावरा प्रजापत, ओम प्रकाश खारोल, दिनेश खारोल उपस्थित रहे।

किसानों ने बताया कि लंबे समय से उनके साथ यह अन्याय हो रहा है, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़े आंदोलन की रणनीति बनाएंगे। किसानों का कहना था कि वे अपने हक के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं ताकि उनके साथ न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

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