शाहपुरा के ग्रामीण अंचलों में महका राज्य पुष्प 'रोहिड़ा', संरक्षण के लिए अनूठा अभियान

Update: 2026-03-18 06:28 GMT

शाहपुरा (मूलचन्द पेसवानी)। राजस्थान दिवस के उल्लास के बीच शाहपुरा क्षेत्र से प्रकृति संरक्षण की एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। मरुस्थल की शान और राजस्थान के राज्य पुष्प 'रोहिड़ा' ने अब शाहपुरा के ग्रामीण इलाकों में अपनी केसरिया और पीत आभा बिखेरनी शुरू कर दी है। पर्यावरण प्रेमी इस दुर्लभ वृक्ष के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक विशेष मुहिम चला रहे हैं, जो पूरे प्रदेश के लिए नजीर बन रही है।

रेगिस्तान का सागवान: सुंदरता और उपयोगिता का संगम

वर्ष 1983 में राज्य पुष्प घोषित किया गया रोहिड़ा (वैज्ञानिक नाम: टेकोमेला अण्डूलाटा) अपनी कठोर लकड़ी के कारण 'मारवाड़ का सागवान' भी कहलाता है। फाल्गुन और चैत्र मास में खिलने वाले इसके फूल न केवल आंखों को सुकून देते हैं, बल्कि जैव विविधता को भी सहारा देते हैं। भंवरे, तितलियां और विभिन्न प्रजातियों की चिड़ियां इन फूलों पर आश्रित रहती हैं। 5 से 7 मीटर ऊंचे इस वृक्ष की विशेषता यह है कि यह कम पानी और कठोर जलवायु में भी शान से खड़ा रहता है।

शाहपुरा के इन गांवों में मिली उपस्थिति

आमतौर पर मारवाड़ और शेखावाटी की पहचान माना जाने वाला रोहिड़ा अब शाहपुरा तहसील के कई गांवों में प्राकृतिक रूप से लहलहा रहा है। प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:

अरनियाघोड़ा, ईटमारिया और दौलतपुरा, प्रतापपुरा, ढीकोला और लूलांस, भोजपुर, कनेछनखुर्द और कनेछनकलां

शिक्षक दिनेश सिंह भाटी की मुहिम लाई रंग

इस खोज और संरक्षण के पीछे स्थानीय शिक्षक और पर्यावरण प्रेमी दिनेश सिंह भाटी का समर्पण है। भाटी पिछले 4-5 वर्षों से इन वृक्षों की निगरानी और शोधपरक कार्य कर रहे हैं। उनका लक्ष्य केवल रोहिड़ा को बचाना ही नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय और राज्य प्रतीकों (बरगद, कमल, खेजड़ी और रोहिड़ा) को रोपित कर नई पीढ़ी को जागरूक करना भी है। इस अभियान में उन्हें किसानों, मजदूरों और कृषि विद्यार्थियों का भरपूर सहयोग मिल रहा है।

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