टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी का 'पिंक सिटी' कनेक्शन:: जयपुर में तैयार हुआ था विश्व विजेता का खिताब, प्लैटिनम और चांदी से बनी है यह खास ट्रॉफी
जयपुर । भारतीय टीम के तीसरी बार टी-20 वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद जहां पूरे देश में जश्न का माहौल है, वहीं इस विश्व कप का राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक ऐसा गहरा नाता है जिसे जानकर हर राजस्थानी का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा। बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस चमचमाती ट्रॉफी को उठाने के लिए दुनिया भर की टीमें जी-जान लगा देती हैं, उसका निर्माण और डिजाइन जयपुर की धरती पर हुआ है।
मशहूर डिजाइनर अमित पाबूवाल ने दी ट्रॉफी को शक्ल
जयपुर के जाने-माने ट्रॉफी डिजाइनर अमित पाबूवाल ने इस खास कनेक्शन का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की कंपनी 'मिनाले ब्राइस' द्वारा शुरुआती डिजाइन तैयार करने के बाद, इस भव्य ट्रॉफी को मूर्त रूप देने का काम उन्होंने ही किया था।
2007 में तैयार हुई आउटलाइन: पाबूवाल के अनुसार, ट्रॉफी की डिजाइन आउटलाइन साल 2007 में तैयार की गई थी, जब टी-20 वर्ल्ड कप का पहला संस्करण आयोजित होना था। उनकी काबिलियत को देखते हुए आईसीसी (ICC) ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी।
आईसीसी ने क्यों किया संपर्क: अमित पाबूवाल ने इससे पहले क्रिकेट जगत की सबसे बड़ी 'सिल्वर फ्रेंडशिप कप' ट्रॉफी डिजाइन की थी। इस उपलब्धि ने आईसीसी का ध्यान खींचा और आखिरकार टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी बनाने का प्रस्ताव उनके पास आया।
तकनीकी चुनौतियां और फाइनल स्वरूप
ट्रॉफी को बनाने का सफर आसान नहीं था। शुरुआत में आईसीसी का विचार कुछ अलग था, जिसे हकीकत में बदलना तकनीकी रूप से कठिन साबित हुआ।
कांच और टाइटेनियम का प्रयोग रहा असफल: आईसीसी चाहती थी कि ट्रॉफी को आधुनिक लुक देने के लिए टाइटेनियम और ग्लास (कांच) के मिश्रण का उपयोग किया जाए। लेकिन धातु के साथ जोड़ते समय कांच बार-बार टूट जाता था।
चांदी और प्लैटिनम से बनी ट्रॉफी: अंततः इस समस्या का समाधान निकालते हुए ट्रॉफी को शुद्ध चांदी से तैयार किया गया और उस पर प्लैटिनम की प्लेटिंग की गई।
वजन और लंबाई: यह ऐतिहासिक ट्रॉफी लगभग 21 इंच लंबी है और इसका वजन करीब 6 किलोग्राम है।
असली ट्रॉफी रहती है आईसीसी के पास
पाबूवाल ने एक दिलचस्प जानकारी साझा करते हुए बताया कि टूर्नामेंट की असली ट्रॉफी हमेशा आईसीसी के मुख्यालय (दुबई) में ही रहती है। विजेता टीम (जैसे इस बार भारत) को बिल्कुल वैसी ही दिखने वाली एक प्रतिकृति (Replica) सौंपी जाती है। जयपुर का यह हुनर आज पूरी दुनिया के सामने क्रिकेट की सबसे बड़ी जीत का प्रतीक बना हुआ है।
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