कोटा मॉडल क्या भीलवाड़ा नगर निगम में लागू होगा? पट्टा, भवन निर्माण और विक्रय स्वीकृति में संभावित बदलाव पर चर्चा
भीलवाड़ा विजय गढ़वाल । राजस्थान के कोटा नगर निगम में हाल ही में किए गए सुधारों ने नागरिकों के लिए पट्टा, भवन निर्माण स्वीकृति और विक्रय स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल, त्वरित और पारदर्शी बना दिया है। कोटा में अब आवेदक को अलग-अलग कार्यों के लिए बार-बार निगम कार्यालय नहीं जाना पड़ता, बल्कि सभी स्वीकृतियां एक साथ जारी हो जाती हैं। कोटा में हुए इस बदलाव के बाद भीलवाड़ा में भी लोगो में ऐसी ही प्रक्रिया भीलवाड़ा नगर निगम में लागू करने की चर्चा तेज हो गई है।
कोटा में हुए सुधार
कोटा नगर निगम ने अपने प्रक्रियाओं में बड़े सुधार किए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
* पट्टा मिलने पर भवन निर्माण स्वीकृति और विक्रय स्वीकृति एक साथ जारी।
* आवेदन की जांच और स्वीकृति के लिए तय समय सीमा।
* रिकॉर्ड रूम से फाइल अधिकतम 3 कार्य दिवस में संबंधित अनुभाग को उपलब्ध कराना।
* नामांतरण मामलों में केवल विशेष परिस्थितियों में विज्ञप्ति प्रकाशित करना।
इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों को निगम कार्यालय में बार-बार चक्कर काटने से बचाना और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करना था।
भीलवाड़ा में संभावित बदलाव
भीलवाड़ा नगर निगम को लेकर ये चर्चा उठ रही है कि क्या कोटा मॉडल की तरह ही पट्टा, भवन निर्माण और विक्रय स्वीकृति एक साथ जारी की जाएगी।कोटा निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने बताया कि पहले आवेदक को अलग-अलग प्रक्रियाओं के लिए बार-बार निगम कार्यालय जाना पड़ता था। शहरी समस्या समाधान शिविरों में नागरिकों की शिकायतों और आवेदन की लंबी देरी को देखते हुए यह जरूरी है कि प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बने।
समय सीमा और प्रक्रिया की संभावना
कोटा मॉडल की तरह, यदि भीलवाड़ा में लागू किया गया, तो निम्नलिखित बदलाव हो सकते हैं:
* पट्टा मिलने पर आवेदक के जमा शुल्क के साथ भवन निर्माण और विक्रय स्वीकृति भी जारी।
* नामांतरण, उपविभाजन-पुनर्गठन और अन्य प्रक्रियाओं के लिए समय सीमा निर्धारित।
* रिकॉर्ड रूम से फाइल तीन कार्य दिवस में उपलब्ध कराई जाएगी।
* नामांतरण मामलों में केवल विशेष परिस्थितियों में विज्ञप्ति प्रकाशित होगी।
नागरिकों की प्रतिक्रिया
शहरी समस्या समाधान शिविरों में आए नागरिकों ने पहले निगम कार्यालय में बार-बार चक्कर काटने पर असंतोष जताया था। नागरिकों का कहना है कि अगर कोटा मॉडल को भीलवाड़ा में लागू किया गया तो आवेदकों को समय और मेहनत की बचत होगी।
नगर निगम में प्रक्रिया लागू होने के बाद आवेदक एक ही आवेदन के तहत सभी स्वीकृतियां प्राप्त कर सकेंगे। यह बदलाव भीलवाड़ा नगर निगम की सेवाओं को अधिक **नागरिक-मैत्रीपूर्ण और प्रभावी** बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता हे ।
कोटा मॉडल को अपनाना भीलवाड़ा नगर निगम के लिए एक बड़ी पहल होगी। इससे नागरिकों की सुविधा बढ़ेगी, निगम की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी और समय पर निस्तारण सुनिश्चित होगा। सवाल यह है कि प्रशासन कब और किस रूप में इस सुधार को लागू करेगा।
एक नजर कोटा मॉडल
क्योंकि राज्य सरकार इसे पूरे राजस्थान में लागू करना चाहती है, जिसमें पट्टा (Patta), भवन निर्माण (Building Construction) और विक्रय स्वीकृति (Sale Approval) प्रक्रियाओं को ऑनलाइन और समयबद्ध (Time-bound) करने पर जोर दिया जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार कम हो और काम जल्दी हो, हालांकि भीलवाड़ा के लिए स्थानीय चुनौतियों और जरूरतों के हिसाब से इसमें स्थानीय बदलाव किए जा सकते हैं।
कोटा मॉडल का सार
एकल खिड़की प्रणाली (Single Window System): सभी स्वीकृतियाँ और परमिट एक ही छत के नीचे या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से मिलें।
समयबद्ध प्रक्रिया (Time-Bound Process): आवेदन जमा करने के बाद निश्चित समय-सीमा में स्वीकृति या अस्वीकृति अनिवार्य।
पारदर्शिता और डिजिटलीकरण (Transparency & Digitization): पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हो।
कोटा मॉडल (कोटा में): कोटा में 'ऑनलाइन आवेदन, समयबद्ध स्वीकृति' जैसी प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, जिससे संपत्ति के हस्तांतरण और निर्माण स्वीकृति में तेजी आई है।
पट्टा (Patta) प्रक्रिया:
डिजिटल पट्टा: भूमि के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और पट्टे जारी करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन करना।
समय सीमा: पट्टा जारी करने के लिए निश्चित समय (जैसे 30-60 दिन) तय करना।
स्वचालित मंजूरी (Automated Clearances): कुछ मामलों में बिना मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित मंजूरी।
भवन निर्माण स्वीकृति (Building Construction Approval):
ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति (Online Plan Approval): बिल्डिंग प्लान ऑनलाइन जमा करना और त्वरित स्वीकृति।
नक्शा सत्यापन ऑनलाइन और मौके पर सत्यापन, समयबद्धता के साथ।
शर्तों में ढील : कुछ नियमों में ढील (जैसे छोटे निर्माणों के लिए) ताकि प्रक्रिया तेज हो।
विक्रय स्वीकृति
संपत्ति हस्तांतरण बिक्री विलेख के बाद स्वामित्व हस्तांतरण को त्वरित करना।
ऑनलाइन पंजीकरण ( उप-पंजीयक कार्यालयों में प्रक्रिया को सरल बनाना।
अनापत्ति प्रमाण पत्र
राज्य सरकार की मंशा: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में शासन को सुगम और पारदर्शी बनाने पर जोर है, YouTube जैसे बजट भाषणों में भी इस पर जोर दिया गया है।
नागरिक सुविधा: आम जनता को राहत और सरकारी काम में तेजी लाना।
भ्रष्टाचार पर अंकुश: पारदर्शिता बढ़ाकर भ्रष्टाचार को रोकना।
