चायनीज मांझे का आतंक,: भीलवाड़ा में महिला की गर्दन कटी, दस टांकों के बाद बची जान

Update: 2026-01-23 07:12 GMT

 भीलवाड़ा BHNशहर में प्रतिबंध के बावजूद चायनीज मांझे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार दोपहर भीलवाड़ा की संजय कॉलोनी की  एक महिला उस समय मौत के मुंह से निकल आई, जब गर्दन पर धारदार चायनीज मांझा फंसने से गहरा चीरा लग गया। गनीमत रही कि समय रहते अस्पताल पहुंचाने से उसकी जान बच सकी।

मिली जानकारी के अनुसार 38 वर्षीय संगीता न्याती पत्नी आशुतोष न्याती सांगानेरी गेट स्थित अपनी दुकान पर घर से चाय लेकर जा रही थीं। जैसे ही वह दूधाधारी मंदिर के बाहर पहुंचीं, अचानक हवा में लटक रहे चायनीज मांझे ने उनकी गर्दन को जकड़ लिया। पलभर में तेज धार से गला कट गया और खून बहने लगा। राहगीरों ने महिला की चीख सुनकर दौड़ लगाई और उसे संभाला।

घटना के बाद आसपास के लोगों में अफरा तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल परिजनों को सूचना दी और घायल महिला को रामस्नेही चिकित्सालय पहुंचाया गया। अस्पताल में सर्जन डॉ योगेश दरगड और नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ विभा जैन ने तत्काल उपचार शुरू किया। डॉक्टरों ने गर्दन पर आए लंबे घाव पर दस टांके लगाकर रक्तस्राव रोका, तब जाकर महिला की हालत स्थिर हुई।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर थोड़ी भी देर हो जाती तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। गर्दन के पास प्रमुख नसें होने के कारण यह चोट जानलेवा साबित हो सकती थी। फिलहाल महिला खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन उसे निगरानी में रखा गया है।

घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि चायनीज मांझे पर रोक होने के बावजूद खुलेआम इसकी बिक्री और उपयोग हो रहा है, जो आमजन के लिए मौत का फंदा बन चुका है। लोगों ने पुलिस और नगर निगम से अपील की कि ऐसे मांझे बेचने वालों और उपयोग करने वालों पर कठोर कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी और की जान खतरे में न पड़े। चायनीज मांझे पर सख्ती जरूरी है, नहीं तो हर गली और हर सड़क पर यह जानलेवा खतरा बना रहेगा और बेगुनाह लोग इसकी चपेट में आते रहेंगे।

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