हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: लंबे समय तक आपसी सहमति से बने रिश्ते को बाद में दुष्कर्म नहीं माना जा सकता
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी के खिलाफ जारी आरोप पत्र (Charge Sheet) को रद्द कर दिया है। जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक चले आ रहे रिश्ते को सिर्फ इसलिए दुष्कर्म नहीं माना जा सकता क्योंकि बाद में वह रिश्ता टूट गया या शादी का वादा पूरा नहीं हुआ।
15 साल का रिश्ता और आपसी सहमति
भिलाई निवासी एक महिला ने मार्च 2020 में आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता वर्ष 2005 से शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बना रहा है। इस पर पुलिस ने धारा 376 और 506 के तहत मामला दर्ज किया था। हालांकि, हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि महिला को आरोपी की सामाजिक स्थिति और शादीशुदा होने जैसी निजी बाधाओं की पूरी जानकारी थी।
न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
* सहमति का आधार: कोर्ट ने कहा कि महिला खुद स्वीकार करती है कि वह 15 साल तक आरोपी के साथ नियमित संपर्क में रही और एक से अधिक बार शारीरिक संबंध बनाए। इतने लंबे समय तक पुलिस या किसी अथॉरिटी से शिकायत न करना यह दर्शाता है कि रिश्ता आपसी मर्जी से था।
* शादी का वादा और अपराध: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक सहमति से बने रिश्ते के बाद यदि शादी का वादा पूरा नहीं होता, तो वह दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता।
* प्रक्रिया का दुरुपयोग: हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और न्याय का उल्लंघन होगा।
अदालत ने यह भी माना कि रिश्ता पूरी जानकारी और समझ के साथ शुरू किया गया था, न कि शुरू से ही किसी धोखे या गलत नीयत के आधार पर। इस फैसले के साथ ही आरोपी के विरुद्ध चल रही कानूनी कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया है।
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