राजस्थान निकाय चुनाव: भीलवाड़ा सहित प्रदेश के 309 निकायों में 'प्रशासक राज', ओबीसी रिपोर्ट ने उलझाया चुनावी गणित
भीलवाड़ा। राजस्थान के शहरी निकायों के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है जब भीलवाड़ा नगर निगम सहित राज्य के सभी पुराने 196 निकायों की कमान पूरी तरह सरकारी प्रशासकों के हाथों में आ गई है। चुने हुए मेयर और सभापतियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में पूरी तरह 'अफसरशाही' का नियंत्रण है। चुनावी प्रक्रिया में हो रही देरी का मुख्य कारण ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का लंबित होना है।
सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन और सरकार की उलझन
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सख्त निर्देश हैं कि प्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में संपन्न कराए जाएं। लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि "ट्रिपल टेस्ट" (OBC आयोग की रिपोर्ट) के बिना राजनीतिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
आयोग को मिला अतिरिक्त समय: राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग का कार्यकाल तीसरी बार बढ़ाते हुए अब 31 मार्च 2026 तक कर दिया है।
आरक्षण लॉटरी का पेच: जानकारों के अनुसार, जब तक आयोग रिपोर्ट नहीं सौंपता, तब तक 309 निकायों में ओबीसी की सीटें तय नहीं हो सकेंगी। रिपोर्ट आने के बाद आरक्षण की लॉटरी निकालने और चुनावी अधिसूचना जारी करने के लिए बहुत कम समय बचेगा।
309 निकायों में एक साथ चुनाव की तैयारी
सरकार प्रदेश के सभी 309 निकायों (पुराने 196 और नए गठित निकाय) में एक साथ चुनाव कराना चाहती है। चूरू के शेष निकायों में भी प्रशासक लगाए जाने के बाद अब पूरे प्रदेश में निर्वाचित बोर्ड अस्तित्व में नहीं हैं। सरकार का कहना है कि उनकी ओर से तैयारियां पूरी हैं, बस आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है।
क्या समय पर होंगे चुनाव?
यदि ओबीसी आयोग 31 मार्च तक अपनी रिपोर्ट देता है, तो निर्वाचन विभाग के पास चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए मात्र 15 दिन का समय बचेगा। ऐसे में संवैधानिक समय सीमा (15 अप्रैल) का पालन करना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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