मातम में बदली नवरात्र की श्रद्धा:: करेड़ा थाने के सारथी कैलाशचंद्र का 'साइलेंट अटैक' से निधन, पुलिस महकमे की आंखें नम
भीलवाड़ा BHN.फर्ज की राह पर चलने वाला एक और योद्धा खामोश हो गया। करेड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल चालक कैलाशचंद्र मीणा का शुक्रवार सुबह थाना परिसर स्थित सरकारी आवास में 'साइलेंट अटैक' से आकस्मिक निधन हो गया। जिस सारथी ने सालों तक खाकी की गाड़ी दौड़ाई, आज उसी के चले जाने से पूरे पुलिस महकमे में सन्नाटा पसरा है।
मंदिर में टेका मत्था, लांगरी से कहा- 'आज मेरा व्रत है'
मृतक कैलाशचंद्र (५०) पुत्र रामसुख मीणा, जयपुर ग्रामीण के जमवा रामगढ़ के निवासी थे। सीसीटीवी फुटेज में उनके जीवन के आखिरी पल कैद हुए हैं, जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर दें। सुबह वे हमेशा की तरह फुर्ती से सरकारी गाड़ी साफ करते दिखे, फिर अटूट श्रद्धा के साथ थाना परिसर के शिव मंदिर और बाहर बालाजी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने लांगरी (रसोइया) से मुस्कुराकर कहा, "आज मेरा नवरात्र का व्रत है, सुबह का खाना मत बनाना, शाम को ही पाऊंगा।" किसे पता था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी।
जमीन पर अचेत मिले, एएसआई की निकल गई चीख
हादसा सुबह करीब 9:40 बजे सामने आया जब एक सहायक उपनिरीक्षक किसी काम से उनके क्वार्टर पर पहुंचे। कैलाशचंद्र वहां जमीन पर बेसुध गिरे पड़े थे। यह मंजर देख एएसआई की चीख निकल गई। थाना प्रभारी पूरणमल मीणा और अन्य स्टाफ तुरंत उन्हें लेकर अस्पताल दौड़े, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रथम दृष्टया मौत का कारण 'साइलेंट अटैक' माना जा रहा है।
हंसमुख स्वभाव ने सबको रुलाया
चालक कैलाशचंद्र अपने मिलनसार और हंसमुख स्वभाव के लिए जाने जाते थे। साथी पुलिसकर्मियों की मानें तो वे हर किसी का हाल-चाल पूछने वाले जिंदादिल इंसान थे। पुलिस ने परिजनों को सूचित कर दिया है, उनके आने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।