ACB court ka faisla: भ्रष्टाचारी ग्राम सेवक को 4 साल की जेल: 'इन्दिरा आवास' की किश्त के बदले मांगी थी रिश्वत

Update: 2026-03-30 19:32 GMT

भीलवाड़ा प्रेमकुमार गढ़वाल। गरीबों के आशियाने पर नजर गड़ाने वाले भ्रष्ट सरकारी कारिंदों के लिए भीलवाड़ा की एसीबी कोर्ट ने एक नजीर पेश की है। एसीबी कोर्ट भीलवाड़ा के न्यायाधीश पवन कुमार सिंघल ने ग्राम पंचायत बिहाड़ा, पंचायत समिति जहाजपुर के त्कालीन ग्राम सेवक एवं पदेन सचिव घनश्याम खटीक को रिश्वत लेने के संगीन जुर्म में 4 साल के कठोर कारावास और 25,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

रिश्वत की भूख: 35 हजार की किश्त के लिए मांगे थे 8 हजार

मामले की पटकथा 4 सितंबर 2015 को शुरू हुई थी, जब बिहाड़ा (जहाजपुर) निवासी परिवादी सोजीराम गुर्जर ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) भीलवाड़ा के समक्ष अपनी पीड़ा रखी थी। सोजीराम का बीपीएल योजना के तहत 'इन्दिरा आवास' पास हुआ था। पहली किश्त मिलने के बाद जब दूसरी किश्त की बारी आई, तो ग्राम पंचायत बिहाड़ा के तत्कालीन सचिव घनश्याम खटीक ने फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 8,000 रुपये रिश्वत की डिमांड कर दी। गरीब की मेहनत की कमाई पर डाका डालने वाले इस सचिव ने साफ कह दिया था कि जब तक पैसा नहीं मिलेगा, किश्त जारी नहीं होगी।

ACB का बिछाया जाल: 'वॉइस रिकॉर्डर' में कैद हुआ सच

तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोपाल स्वरूप मेवाड़ा और उप अधीक्षक कृष्णकांत शर्मा के निर्देशन में एसीबी ने जाल बिछाया। सबसे पहले वॉइस रिकॉर्डर के जरिए रिश्वत की मांग का सत्यापन किया गया, जिसमें आरोपी सचिव घनश्याम खटीक परिवादी से 7,000 रुपये लेने पर राजी हुआ।

संतोष नगर में 'ट्रैप': धरे गए सचिव साहब

6 सितंबर 2015 को एसीबी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जहाजपुर के संतोष नगर स्थित आरोपी के निवास पर धावा बोला। परिवादी ने जैसे ही पाउडर लगे हुए 7,000 रुपये सचिव को थमाए, इशारा मिलते ही एसीबी टीम ने उसे दबोच लिया। आरोपी के हाथ जब सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाए गए, तो पानी का रंग गुलाबी हो गया, जो उसके भ्रष्टाचार का जीवंत प्रमाण था। पकड़े जाने पर आरोपी ने 'उधार लेन-देन' का बहाना बनाकर बचने की नाकाम कोशिश की, लेकिन एसीबी की पुख्ता तैयारी के आगे उसकी एक न चली।

आरोपित को अदालत ने सुनाई सजा, लगाया जुर्माना

विशिष्ट लोक अभियोजन के.के. शर्मा के अनुसार, सालों तक चली कानूनी प्रक्रिया और एसीबी द्वारा पेश किए गए ठोस गवाहों और सबूतों के आधार पर माननीय न्यायालय ने आरोपी घनश्याम खटीक पुत्र देवबक्श खटीक को दोषी करार दिया। कोर्ट ने आरोपी को 4 साल की सजा सुनाई। 

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