बजरी खनन पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला:: भीलवाड़ा सहित प्रदेश के 93 खनन पट्टों की लीज रद्द, बनास में एक भी लीज नहीं

Update: 2026-01-21 03:43 GMT

​जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और नियमों की पालना को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने डॉ. बृजमोहन सपूत कला संस्कृति सेवा संस्थान की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के 93 बजरी खनन पट्टों की ई-नीलामी के आदेश को रद्द कर दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा व अधिवक्ता अलंकृता शर्मा ने कोर्ट को बताया कि भीलवाड़ा के 46, टोंक के 34, अजमेर के 9 व सवाईमाधोपुर के 4 क्षेत्रों में बजरी की लीज के लिए नीलामी की जा रही थी, जिनमें वे क्षेत्र भी शामिल थे जहां 2022, 2023 व 2024 में भी बजरी खनन की लीज जारी की गई।

​नियमों की अनदेखी पड़ी भारी:

अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार एक बार खनन अवधि पूरी होने के बाद उस क्षेत्र में अगले 5 साल तक खनन नहीं किया जा सकता, ताकि नदियों में प्राकृतिक रूप से बजरी का पुनर्भरण (Replenishment) हो सके। कोर्ट ने नाराजगी जताई कि राज्य सरकार ने 12 से 100 हेक्टेयर के छोटे ब्लॉक बनाकर पुराने क्षेत्रों को फिर से नीलाम कर दिया, जो नियमों के विरुद्ध है।

​सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना:

वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा और अलंकृता शर्मा ने दलील दी कि सरकार ने साल 2021 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूर की गई सीईसी (CEC) की रिपोर्ट की अवहेलना की है। याचिका में बताया गया कि अनवरत खनन से:

​नदियों का तल गहरा हो रहा है और भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।

​नदी किनारे की जमीनें बंजर हो रही हैं और जलीय जीवन (मछली पालन स्थल) नष्ट हो रहे हैं।

​राजस्थान की नदियां बारहमासी नहीं हैं, जिससे मानसून में भी इनका पुनर्भरण पूरी तरह नहीं हो पाता।

​सरकार से मांगी रिपोर्ट:

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करे कि जिन स्थानों से बजरी निकाली जा रही है, वहां पुनर्भरण कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। कोर्ट ने सरकार को यह रिपोर्ट हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका में रखने के निर्देश दिए हैं।

अब भीलवाड़ा में केवल 4 लीज शेष, बनास में एक भी नहीं

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब जिले में केवल 4 पुरानी लीज ही संचालित रहेंगी, जो मार्च 2023 से पहले की हैं। खास बात यह है कि ये चारों लीजें बनास नदी क्षेत्र से बाहर हैं। सहाड़ा में चंद्रभागा नदी, रायपुर में कोठारी नदी, आसींद व शाहपुरा में खारी नदी में है। ये लीजें भी जुलाई और दिसंबर 2027 तक समाप्त हो जाएंगी। भीलवाड़ा में बनास की बजरी की मांग सबसे अधिक रहती है। अब बनास में एक भी लीज नहीं बचने से कालाबाजारी बढ़ने और अन्य जिलों से बजरी मंगवाने के कारण दाम आसमान छू सकते हैं।

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