सुप्रीम कोर्ट का आदेश:: सभी स्कूलों में लड़कियों को फ्री सैनेटरी पैड और अलग वॉशरूम अनिवार्य

Update: 2026-01-30 10:18 GMT

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देश के सभी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया कि हर स्कूल में लड़कियों को फ्री में सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य होगा और लड़के व लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाए जाएं। जो स्कूल ऐसा नहीं करेंगे उनकी मान्यता रद्द की जाएगी।

इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि हर स्कूल में दिव्यांग-अनुकूल टॉयलेट बनाए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 2024 में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया। याचिका जया ठाकुर ने लगाई थी, जिसमें केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति को पूरे देश में लागू करने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट नहीं हैं तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत बराबरी के अधिकार का उल्लंघन है। अगर लड़कियों को सैनेटरी पैड उपलब्ध नहीं कराए जाते तो वे लड़कों की तरह पढ़ाई और गतिविधियों में बराबरी से हिस्सा नहीं ले पातीं। मासिक धर्म के दौरान सम्मानजनक सुविधा मिलना अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा का अधिकार है।

यह आदेश सिर्फ कानूनी व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए नहीं है, बल्कि उन क्लासरूम, टीचर्स और माता-पिता के लिए भी है, जहां लड़कियां मदद मांगने में झिझकती हैं या संसाधनों की कमी के कारण मदद नहीं मिल पाती। कोर्ट ने कहा कि यह समाज के लिए भी है ताकि प्रगति का पैमाना यह तय हो कि हम अपने सबसे कमजोर वर्ग की कितनी सुरक्षा करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कदम हर उस बच्ची तक संदेश पहुंचाने के लिए है, जो स्कूल में अबसेंट होती रही क्योंकि उसके शरीर को बोझ की तरह देखा गया, जबकि इसमें उसकी कोई गलती नहीं है।

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